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क्षेत्र में नहीं हो सका है रोजगार का सृजन, मजदूरों का पलायन अब भी है जारी

संसू, वारिसलीगंज : आजादी के बाद वारिसलीगंज विधानसभा क्षेत्र के लोगों के लिए रोजगार का प्रमुख केंद्र वारिसलीगंज का चीनी मिल रहा था। जो 1993 में बंद कर दिया गया था। इस बीच राज्य में दो बार राजद और तीन बार एनडीए की सरकार बनी। क्षेत्र से कई लोग जीत कर विधानसभा पहुंचे भी। लेकिन किसी ने क्षेत्र में बढ़ती बेरोजगारी के बारे में नहीं सोचा। चुनाव जीतने के बाद नेता जी को पांच सालों तक बेरोजगारों के समस्या याद नहीं आई। क्षेत्र में जब भी चुनाव का मौसम आता था तब लोगों के मन में चीनी मिल खुलवाने की मांग हिलोरे मारने लगती थी। लेकिन नीतीश कुमार की तीसरी पाली की सरकार ने चीनी मिल को ही समाप्त कर नवादा के साथ सौतेला व्यवहार किया है। मिल बंद होने के बाद क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं का बड़े पैमाने पर महानगरों की ओर पलायन होने लगा। जो अनवरत जारी है। पिछले मार्च माह से देश में कोरोना का प्रवेश हुआ, बीमारी का प्रसार रोकने को लगातार लॉक डाउन लगाया गया। जिस कारण जैसे तैसे पुन: बेरोजगार हो चुके युवा अपने घरों का रुख किया। जिले में रोजगार का कोई नया आयाम नहीं होने से लॉक डाउन पीरियड में गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवार के युवाओं के समक्ष आर्थिक परेशानी बढ़ी। तब जैसे जैसे अनलॉक होना शुरू हुआ युवाओ का पलायन भी जारी हो गया। फिलवक्त क्षेत्र के अधिकांश अनुसूचित टोले के युवा एवं महिलाओं की बड़ी आवादी बड़े बड़े वाहनों से बंगाल, यूपी, हरियाणा, चंडीगढ आदि स्थानों के इंट भट्ठा के लिए पलायन कर रहे हैं। जिसके लिए रोजगार सृजन का सरकार को तनिक भी चिता नहीं है। क्षेत्र के युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं। जबकि जिला पूर्णत: उधोग बिहीन है। फलस्वरूप यहां के युवा दूसरे प्रदेशों के कल कारखाने का गुणवत्तापूर्ण उत्पादन कर उसकी प्रतिष्ठा को बढाते हैं, वाबजूद वहां के लोग बिहारी कह अपमानित करने का कार्य करते हैं। कुछ वर्ष पूर्व क्षेत्र के भाजपा सांसद डॉ भोला प्रसाद सिंह ने एक जनसभा के दौरान राज्य सरकार की नीतियों पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि नीतीश जी की मॉनसून सिर्फ नालंदा में ही बरसती है। नवादा सौतेलापन का शिकार है। उनका कहना भी सही साबित हुआ क्योंकि नीतीश कुमार अपने तीन कार्यकाल को पूरा किया लेकिन नवादा में एक भी रोजगार परक कल कारखानों का सृजन नहीं किया गया। अलबत्ता बंद चीनी मिल के अस्तित्व को ही समाप्त कर डाला।




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क्षेत्र के युवाओं में तेजी से हो रहा भटकाव
-बेरोजगारी का दंश झेल रहे वारिसलीगंज प्रखंड के युवाओं में ठगी के प्रति रुझान बढ़ा है। फलत: डिजिटिलाइज इंडिया में ठगी के धंधे के कमाई का जरिया बनाने में जुड़ने लगे हैं। नित्य नई नेटवर्किंग ठगी को मध्यम बना रहे हैं। जो बिहार की स्मिता को धूमिल कर रहा है। हलांकि ठगी का धंधा भी मुख्यमंत्री जी के पैतृक जिला नालंदा के कतरीसराय प्रखंड से पनपकर अब कुकुरमुत्ते की भांति सम्पूर्ण क्षेत्र में ़फैल चुका है। जिस कारण जिले के युवाओ में शिक्षा ग्रहण करने के प्रति रुझान कम होने लगा है।
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