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गेहूं, आलू व तेलहनी फसल की जल्द बोआई करें किसान

- समय से गेहूं की बोआई होने से होती है उत्तम पैदावार --------------------



- लेट वेरायटी के प्रभेद वाले गेहूं की बुआई दिसंबर तक भी हो सकती
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संवाद सूत्र, वारिसलीगंज (नवादा) : क्षेत्र के किसानों के लिए खेती का यह बहुमूल्य समय है। किसान आलू, गेहूं तथा तिलहन फसलों की बोआई में तन मन से जुटे हैं। लेकिन, लॉकडाउन व पैक्स अब तक धान खरीद नहीं कर रहा है। फलत: किसानों के समक्ष उत्पन्न आर्थिक तंगी के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खेतों की जुताई व खाद के लिए किसान महाजन से कर्ज लेकर या औने पौने दामों पर धान बेचकर गेहूं व आलू की बुआई में जुटे है। मकनपुर के किसान राजू कुमार ने बताया कि आलू का भाव कमने की बजाए बढ़ता जा रहा है। खाद भी महंगा है। धान पैक्स द्वारा लिया नहीं जा रहा है। घर में रुपये नहीं है। जो रुपये थे उससे खेतों की जुताई करवाया है। गेहूं की बुआई करवाया जा रहा है। लेकिन आलू की बुआई कुछ बुआई शेष है। कर्ज लेकर जल्द ही डेढ़ बीघा खेत में आलू की बोआई किया हूं। जबकि कुछ और लगाने को लेकर खेत की तैयारी में है। इसी प्रकार से कुंदन सिंह ने बताया कि खेती महंगी हो गई है। सरकारी कृषि सुविधा भी समय से नहीं मिल रही है। ----------------- समय से खेती करने की जरूरत -कृषि समन्वयक पंकज कुमार ने रबी फसलों की बुआई इस सप्ताह पूरी कर लेने की सलाह दी है। बताया कि गेहूं व आलू की बोआई किसान किसी कारण से अभी तक नहीं किये है तो अविलंब कर ले। उन्होंने बताया कि गेहूं, आलू रोपनी दिसंबर के अन्तिम सप्ताह तक की जा सकती है परन्तु 25 नवम्बर के बाद विलंब से गेंहू की बुआई करने पर प्रत्येक दिन 25-35 किलो/एकड़ गेंहू की पैदावार कम हो जाती है। इस मौसम में बोआई होने से फसल पैदावार बेहतर होता है। उन्होंने बताया कि वैसे विलंब अवधि के गेहूं एचडी-2285, एचआई-1563, पीबीडब्लू-590 इत्यादि किस्में की बुआई 25 दिसंबर तक की जा सकती है।

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