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सोमवती अमावस्या आज, सुहागन महिलाएं पूजा-अर्चना को तैयार

संवाद सहयोगी, नवादा : हिदू धर्म में सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व है। यह साल में 2 से 3 बार पड़ता है। साल के अंतिम सोमवती अमावस्या इस बार मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि 14 दिसंबर यानि कि सोमवार को है। यह दिन भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन व्यक्ति अपने मृतक रिश्तेदारों की आत्मा की शांति के लिए पवित्र नदी में डुबकी लगाकर प्रार्थना करते हैं और उनके नाम का दान करते हैं। सुहागिन महिलाओं के लिए यह दिन खास होता है।



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महिलाएं इसलिए करती हैं यह व्रत
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- सोमवती अमावस्या का व्रत विवाहित स्त्रियां अपने सुहाग की लंबी उम्र की कामना के लिए करती हैं। इस दिन मौन व्रत करने का विधान है। मान्यता है कि ऐसा करने से सहस्त्र गोदान का फल मिलता है। इस दिन विवाहित स्त्रियां पीपल के वृक्ष की दूध, जल, पुष्प, अक्षत और चंदन से पूजा करती हैं। इसके बाद 108 बार धागा लपेट कर परिक्रमा कर प्रार्थना करती हैं कि उनके पति दीर्घायु हों।
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सोमवती अमावस्या को लेकर कई कहानियां हैं प्रचलित
- गरीब ब्राह्मण दंपति की कथा भी इससे जुड़ी है। दंपती की एक पुत्री थी जो सर्वगुण संपन्न थी। जब वह कन्या विवाह योग्य हुई तो ब्राह्मण ने वर की खोज शुरू की। लेकिन वह काफी गरीब थे तो विवाह की बात नहीं बन पा रही थी। हर जगह से निराशा ही मिलती थी। तभी एक दिन एक साधु ब्राह्मण देवता के घर पहुंचे और कन्या के सेवा भाव से वह काफी प्रसन्न हुए। उन्होंने कन्या को लंबी आयु का वरदान दिया और ब्राह्मण के पूछने पर विवाह न होने के बारे में कन्या के हाथ में विवाह की रेखा नहीं होना बताया। इसके उपाय को लेकर उन्होंने बताया कि पड़ोस के गांव में एक सोना नाम की धोबिन का परिवार है। यदि कन्या उनकी सेवा करे और धोबिन उसे अपना सुहाग दे दे तो उसका विवाह हो सकता है।
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जब धोबिन ने दे दिया अपना सुहाग
- साधु देवता के मुख से सोना धोबिन की सेवा की बात सुनकर कन्या ने ऐसा ही करने का प्रण लिया। इसके बाद वह रोज भोर में ही जाकर धोबिन के घर का सारा काम करके चली आती। सोना बहुत ही खुश कि उसकी बहू सारा काम कर लेती है। एक दिन उसने बहू से कहा कि वह कितनी अच्छी है घर का सारा काम निपटा लेती है। तब उसने कहा कि वह तो सोती रहती है। इसपर हैरान होकर दोनों ने अगले भोर की प्रतीक्षा की। तभी उन्होंने देखा कि एक कन्या आती है और उनके घर का काम करने लगती है। तभी सोना उसे रोककर पूछती है कि वह कौन है? और यह सब क्यों करती है? कन्या धोबिन के पैरों पर गिर पड़ी और अपना दुख सुनाया। इस पर सोना तैयार हो गई और अगली सुबह अपना सुहाग देने की बात कही। अगले दिन सोमवती अमावस्या का दिन था। सोना को पता था कि सुहाग देने पर उसके पति का देहांत हो जाएगा। लेकिन वह व्रत करके कन्या के घर की ओर चली। वहां पहुंचकर उसने अपना सिदूर कन्या की मांग में लगा दिया। उधर सोना के पति की मृत्यु हो गई। लौटते वक्त पीपल के पेड़ की पूजा करके सोना ने परिक्रमा की। घर लौटी तो देखा कि उसका पति जीवित है। उसने ईश्वर को कोटि-कोटि धन्यवाद दिया। तब से यह मान्यता है कि यह व्रत करने से पति को लंबी उम्र मिलती है।
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सोमवती अमावस्या के दिन स्नान का विशेष महत्व
- इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि महाभारत में भीष्म ने युधिष्ठिर को इस दिन का महत्व समझाते हुए कहा था कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने वाला मनुष्य हर रूप से सुखी-समृद्ध होगा। साथ ही वह पूर्ण रूप से स्वस्थ्य और सभी दुखों से मुक्त भी होगा। मान्यता यह भी है कि इस दिन स्नान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
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