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संग्रहालय में क्यूआर कोड स्कैन कर जान सकेंगे संग्रहों की महिमा

अमित सिंह, प्रयागराज : इलाहाबाद संग्रहालय आधुनिकता के साथ कदम मिलाकर चलने को प्रयासरत है। संग्रहों पर क्यूआर कोड लगाने का काम चल रहा है। दस्तावेजी संयोजन का कार्य पूरा कर लिया है। जुलाई तक पर्यटक इस तकनीक का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। इस विधा से देश-विदेश से आने वाले पर्यटक डिजिटल माध्यम का उपयोग कर प्राचीन प्रतिमा वीथिका के बार में जान सकेंगे। खास बात यह कि इसमें हिदी और अंग्रेजी भाषा के साथ एक वीडियो भी देखने को मिलेगा।



अभी कोई पर्यटक किसी प्राचीन प्रतिमा संग्रह को देखता तो गाइड उसे इसके विषय में सामान्य जानकारी प्रदान कर देते हैं। अब उन्हें मुख्य रूप से पूरी जानकारी क्यूआर कोड स्कैन करते ही प्राप्त हो जाएगी। पायलेट प्रोजेक्ट के तहत अभी एकमुखी शिवलिंग, बोधिसत्व मैत्रेय आदि प्रतिमाओं सहित 70 संग्रहों में क्यूआर कोड लगाया जाएगा। इसके बाद पूरे परिसर के शेष पुरातत्व पर इसे लागू किया जाएगा। यह प्रयोग जिग्यासुओं व शोधाíथयों के लिए विशेष रूप से सहायक होगा। प्ले स्टोर से डाउनलोड करना होगा क्यूआर स्कैनर
इस तकनीक का लाभ उठाने के लिए पर्यटकों को गूगल प्ले स्टोर से क्यूआर कोड स्कैनर डाउनलोड करना होगा। इसके बाद वह इसका लाभ प्राप्त कर सकेंगे। यह फ्री एप है। इलाहाबाद संग्रहालय पर्यटकों, कलाप्रेमियों और शोधाíथयों के लिए क्यूआर कोड सिस्टम द्वारा संग्रहों के विषय में सूचना उपलब्ध कराने की ओर कदम बढ़ा चुका है। इस तकनीक को पायलट प्रोजेक्ट के तहत संग्रहालय के प्राचीन प्रस्तर प्रतिमा वीथिका के मुख्य आकर्षण जैसे एकमुखी शिवलिंग, बोधिसत्व मैत्रेय आदि प्रतिमाओं पर लगाया जाएगा। इसके परिणाम के दृष्टिगत आगे विस्तार की योजना है।
-डा. सुनील गुप्ता, निदेशक संग्रहालय।

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