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स्पाइवेयर का खतरा: फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम पर कब्जा कर रहा पेगासस, ऐसे करें बचाव

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पेगासस स्पाइवेयर इतना शक्तिशाली है कि आईफोन व एंड्रॉयड जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम पर कब्जा करने की क्षमता रखता है। सॉफ्टवेयर विशेषज्ञों का कहना है कि इसी वजह से इसकी चपेट में आए फोन का नियंत्रण भी स्पाइवेयर के पास चला जाता है। भारत सहित 50 देशों के 50 हजार से ज्यादा लोगों के फोन में इस स्पाइवेयर से निगरानी में रखने का दावा किया गया है। इनमें करीब एक हजार पत्रकारों की पहचान हुई है। आरोप हैं कि यह निगरानी संबंधित देशों की सरकार करवा रही है क्योंकि इस्राइली समूह एनएसओ द्वारा विकसित इस स्पाइवेयर को सिर्फ सरकारों को बेचने की बात सामने आई है। टारगेट तक बेहद आसान पहुंच फोन में पहुंचने के लिए पेगासस जटिल प्रक्रिया नहीं अपनाता। किसी भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजे लिंक या व्हाट्सएप कॉल के जरिये इसे टारगेट के फोन में पहुंचाया जाता है। इसके बाद यह असली काम शुरू करता है, यानी फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम पर कब्जा। माध्यम : रूटिंग और जेलब्रेकिंग से करता है कब्जा एंड्रॉयड फोन में रूटिंग और एपल के आईओएस में जेलब्रेकिंग के जरिये यह ऑपरेटिंग सिस्टम पर कब्जा करता है। एंड्रॉयड फोन में रूटिंग आमतौर पर ऐसे किसी एप या गेम के लिए होती है, जो ऑपरेटिंग सिस्टम को सपोर्ट नहीं करते। तय सीमा से अलग फोन का इस्तेमाल करने के लिए भी एंड्रॉयड फोन की रूटिंग की जाती है। आईओएस पर भी उन एप को इंस्टॉल करने के लिए जेलब्रेकिंग होती है जो, एप स्टोर पर उपलब्ध नहीं होते। परिणाम : सुरक्षा खत्म रूटिंग और जेलब्रेकिंग से फोन के सुरक्षा फीचर काम करना बंद कर देते हैं या उन्हें हटा दिया जाता है। फोन नए कोड और फीचर्स पर काम करने लगता है। एपल के फोन को ज्यादा सुरक्षित माना जाता है, लेकिन अधिकतर मामलों में आईफोन ही पेगासस का शिकार बने। एपल यूजर्स का ज्यादा टारगेट होना इनमें बड़ी कमी की ओर इशारा करता है। कैसे पता करें, हम हैं टारगेट? फोन में इसकी मौजूदगी जानने के लिए मोबाइल वेरीफिकेशन टूलकिट का इस्तेमाल किया जाता है। इसे लिनक्स या मैक ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलाया जाता है। फोन का बैकअप लेकर फाइलों व कंफीग्रेशन का विश्लेषण किया जाता है। इसके बावजूद, जांच पक्के तौर पर नहीं बताती कि फोन में स्पाइवेयर है भी या नहीं! वह केवल संकेत देती है कि स्पाइवेयर हो सकता है। लिंक पर क्लिक से पहले विश्वसनीयता जांचें लिंक से सावधान- फोन से किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले यह पक्का करें कि वह विश्वसनीय है। इसे जांचने का सबसे अच्छा तरीका है कि यह देखें, लिंक किसने भेजा है? आमतौर पर यह लिंक ईमेल, एसएमएस, व्हाट्सएप मैसेज या सोशल मीडिया संदेश में भेजे जाते हैं। इन्हें खोलने से पहले देखें कि जिसने इसे भेजा क्या आप उस पर विश्वास कर सकते हैं? सावधानी बरत कर आम यूजर्स न केवल पेगासस बल्कि वित्तीय फ्रॉड करने वाले साइबर अपराधियों से भी बच सकते हैं। फोन अपडेट रखें- यूजर्स को एंड्रॉयड व आईओएस अक्सर अपडेट भेजते हैं। इन्हें फोन में जरूर इंस्टॉल करें। इनमें अक्सर वे सिक्योरिटी पैच होते हैं जिनसे फोन की सुरक्षा मजबूत होती है। पब्लिक वाईफाई से बचें- सार्वजनिक स्थानों पर वाईफाई उपलब्ध करवाए जाते हैं। अगर आपको आशंका है कि आपके फोन से संवेदनशील जानकारियां लीक हो सकती हैं, तो इन सार्वजनिक वाईफाई का इस्तेमाल करने से बचें। डाटा एंक्रिप्शन- फोन में मौजूद डाटा एंक्रिप्ट करें। कोड, फिंगरप्रिंट या फेसलॉक आदि फीचर का इस्तेमाल करें। रिमोट वाइप फीचर का इस्तेमाल भी करें। फोन खो गया तो इनके जरिये मौजूद डाटा मिटा सकेंगे। DailyhuntDisclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Dailyhunt. Publisher: Amar Ujala

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