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बच्चे हो रहे वायरल बुखार के शिकार, अस्पताल में नहीं है पारासिटामोल सीरप

जागरण संवाददाता, सुपौल: कभी गर्मी तो कभी बारिश यानी बदलते मौसम के चलते बच्चों में वायरल बुखार के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। वायरल बुखार के चलते अस्पतालों के ओपीडी में भी मरीजों की संख्या बढ़ी है। इलाज के लिए अस्पताल आने वाले कुछ बच्चों में तेज बुखार, उल्टी दस्त की समस्या भी देखी जा रही है। बच्चों में यह बुखार चार से छह दिन तक चल रहा है। साथ ही उनमें खांसी-जुकाम की भी शिकायत मिल रही है। कुछ बच्चों में सांस लेने में परेशानी भी देखी जा रही है। दरअसल मौसम परिवर्तन के चलते बच्चे वायरल बुखार,खांसी, सर्दी के शिकार हो रहे हैं। उमस, गर्मी व बारिश से इस मौसम में शरीर पर किसी भी वाह्य रोग का असर जल्दी होता है। यह मौसम बदलने के दौरान होने वाली बीमारी है, जब भी मौसम बदलता है तब तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण मानव शरीर प्रतिरक्षी तंत्री कमजोर पड़ जाती है और शरीर जल्दी वायरस के संक्रमण में आ जाता है।



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है आम बीमारी
वायरल फीवर बदलते मौसम में होने वाली आम बीमारी है, जो तेजी से बच्चों को अपना शिकार बना रही है। फिलहाल इसके शिकार अधिकांशत: एक वर्ष से आठ वर्ष तक के बच्चे हो रहे हैं। अस्पताल में वायरल फीवर के बढ़ते मरीज के बीच कई दवाईयां नदारद दिखती है। मंगलवार को जब तहकीकात की गई तो पता चला कि ओपीडी के दवा काउंटर में पारासिटमोल सीरप नहीं है। यह दवाई कई दिन से नहीं है।
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वायरल फीवर के लक्षण
सिर दर्द
जोड़ों में दर्द
आंखों का लाल होना
माथा बहुत तेज गर्म होना
उल्टी और दस्त होना
बाडी का टेम्प्रेचर बढ़ना
ठंड और कंपकपी लगना
सर्दी, जुकाम, नाक बहना
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कहते हैं डाक्टर
कभी-कभी बारिश के बाद निकलती तेज धूप और चिलचिलाती गर्मी तापमान में बदलाव कर देती है, जिससे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। यही कारण है कि बुखार के वायरस आसानी से शरीर में घर कर जाते हैं। ऐसे समय में बच्चे को ठंडा पानी, कोल्ड ड्रींक्स आदि से दूर रखें। अगर घर का कोई सदस्य सर्दी-खांसी या बुखार से पीड़ित है तो दूसरे बच्चे भी संक्रमित हो सकते हैं।
-डा.हरिशंकर कुमार,
सदर अस्पताल, सुपौल

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