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20 वर्षों से शंकर बांध व सड़क किनारे यायावर का जीवन जी रहे विस्थापित परिवार, कटिहार में कब तक रहेंगे ये बेहाल

संवाद सूत्र,अमदाबाद, कटिहार। गंगा नदी के कटाव से विस्थापित परिवारों की तादाद हर साल बढ़ रही है। अमदाबाद प्रखंड में गंगा का कटाव हर वर्ष कहर ढ़ाती है। पुनर्वास की कोई ठोस नीति नहीं होने के कारण विस्थापित परिवारों को पुनर्वास के लिए अब तक जमीन भी उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। कुछ परिवारों के लिए जमीन तो चिन्हित किया गया। पिछले दो दशक से विस्थापित परिवार शंकर बांध व सड़क किनारे अपना आशियाना बना यायावर का जीवन जीने को विवश हैं। कटाव के कारण गंगा नदी के गर्भ में हर साल कोई न कोई गांव समा रहा है।
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कटाव से विस्थापितों का आशियाना बना शंकर बांध
गंगा नदी के कटाव से गोलाघाट, मेघुटोला, हरदेव टोला, झब्बू टोला, सूबेदार टोला, युसूफ टोला, धन्नी टोला, खट्टी, जामुन तल्ला आदि गांव बुरी तरह प्रभावित है। धन्नी टोला, खट्टी टोला, जामुन तल्ला गांव पूरी तरह कट कर गंगा नदी में समा गई है। इन गांवों का नाम अब केवल सरकारी दस्तावेज में ही दर्ज है। गोलाघाट,मेघुटोला, झब्बू टोला, सूबेदार टोला, युसूफ टोला गांव का भी एक हिस्सा कटाव की भेंट चढ़ चुका है। गंगा नदी के कटाव से विस्थापित परिवारों के लिए शंकर बांध करीब दो दशक से शरण स्थली बना हुआ है। प्रखंड के हरदेव टोला के समीप शंकर बांध पर गोलाघाट, मेघुटोला, हरदेव टोला के विस्थापित परिवार शरण लिए हुए हैं। चौकिया पहाड़पुर सोमवारी हाट के समीप शंकर बंध पर जामुन तल्ला गांव के कटाव पीडि़त शरण लिए हुए हैं।
80 के दशक से जारी है कटाव
80 के दशक से अमदाबाद में गंगा नदी का कटाव लगातार हो रहा है। कल तक जो रैयत थे आज विस्थापित होकर बांध पर रहने को विवश हो गए हैं। लंबे समय से कटाव पीडि़त विस्थापित बांध व सड़क किनारे शरण लिए हुए हैं। पुनर्वास को लेकर कोई ठोस पहल अब तक नहीं की जा सकी है। कुछ स्थानों पर जमीन तो चिन्हित किया गया, लेकिन निचले इलाके में होने के कारण विस्थापित परिवार वहां रहना नहीं चाहते।

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