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Exclusive: ओटीटी में स्टार सिस्टम नहीं उम्दा एक्टर्स वाला सिस्टम चलता है- नेहा शर्मा

ज़ी 5 पर रिलीज हुई फ़िल्म आफत ए इश्क़ में अभिनेत्री नेहा शर्मा नज़र आ रही हैं. नेहा कहती हैं कि अपने करियर में मैं परफॉर्मेंस ओरिएंटेड किरदार के लिए लगातार संघर्ष से जूझती रही हूं. इस तरह के किरदार मेरे करियर में बहुत कम आये हैं तो मैं पूरी शिद्दत के साथ इसे करना चाहती थी. उर्मिला कोरी से हुई बातचीत

आफत ए इश्क़ की स्क्रिप्ट पढ़कर आपका क्या रिएक्शन था?
मुझे जब कहानी सुनायी गयी तभी मुझे लगा कि मुझे ये फिल्म करनी है. फिल्म की कहानी ही नहीं मेरा किरदार भी काफी मज़ेदार है. ऐसी फिल्में बहुत कम बनती हैं. जब मैं निर्देशक और फिल्म की टीम से मिली तो तुरंत एक कनेक्शन बन गया था. जैसा मैं लल्लो के किरदार और कहानी को देख रही थी हमारे निर्देशक इंद्रजीत भी वैसा ही कुछ सोच रहे थे तो इस फिल्म का हिस्सा मुझे बनाना उनके लिए आसान था. फिल्म से जुड़ गयी और फिर तैयारियां भी शुरू हो गयी.
इस फ़िल्म में आपका किरदार छोटे शहर से है असल जिंदगी में आप बिहार से हैं तो किरदार की तैयारियों में कितनी मदद मिली?
ये कहानी लखनऊ में आधारित है. मैं भी छोटे शहर से हूँ तो मैंने किरदार में अपने इनपुट्स दिए हैं. लल्लो का किरदार शुरुआत में ऐसा है कि वो ऐसी रहे कि लोग उसको नोटिस भी ना करें. हम अपने स्कूल में दो चोटी बनाकर जाते थे. वो भी तेल लगाकर चिपकाकर तो इस फिल्म में मैंने वैसी ही चोटियां बनायीं हैं. एक दम सादा लुक एकदम मेकअप नहीं. शुरू में लल्लो ऐसी है कि आप उसे दुबारा मुड़कर नहीं देखें. लल्लो का किरदार अपने कपडे खुद सिलकर पहनती है सलवार कमीज तो उस पर भी हमने बहुत ध्यान दिया है. किरदार की जो भाषा है उसको भी पकड़ने में मेरा छोटे शहर का कनेक्शन काम आया क्योंकि मैं उस हिंदी से वाकिफ हूं. छोटे शहर से हूं तो किरदार के माइंडसेट को मैं समझती हूं.
इस फिल्म का कहीं ना कहीं आप चेहरा है तो क्या प्रेशर भी है?
नहीं यार वो प्रेशर मैं लेना नहीं चाहती हूं. एक एक्टर के तौर पर आप अपना काम कर सकते हो. अपने काम को १०० प्रतिशत दे सकते हो उसके बाद जो चीज़ें होती हैं. वो आपके कंट्रोल में नहीं होती है. टेंशन लेकर कोई फायदा नहीं है.
आफत ए इश्क़ इस शीर्षक से आप कितना जुड़ाव महसूस करती हैं?
मुझे लगता है कि इश्क़ आफत के साथ ही आती है. वैसा कोई इश्क़ होता ही नहीं जो आफत के बिना आता है. मेरे अनुभवों के आधार पर मैं यही कह सकती हूं. इश्क़ में परेशानियां आती ही आती हैं मज़ा भी तभी आता है अगर सबकुछ स्मूथली है तो फिर वो इश्क़ नहीं है.
क्या ओटीटी ने स्टार्स सिस्टम के तिलस्म को खत्म कर दिया है?
हां, ओटीटी में सेलेक्शन इस आधार पर नहीं हो रहा है कि कौन कितना बड़ा स्टार है. कौन इस रोल में सही बैठता है. कौन इस परफॉरमेंस को अच्छे से कर सकता है. चाहे वो स्टार हो या ना हो। यही वजह है कि ओटीटी ने कई उम्दा नए एक्टर्स को जोड़ा है. जो पुराने चेहरे थे जो अच्छे एक्टर थे लेकिन फिल्मों में उन्हें मौके नहीं मिल रहे थे ओटीटी उन्हें मौके दे रहा है. ओटीटी स्टार सिस्टम को खत्म कर एक्टर्स को प्राथमिकता देता है.
ओटीटी मौके अच्छे हैं लेकिन यह काफी बोल्ड भी है?
मैं वही काम करना चाहती हूँ जिसके लिए मैं १०० प्रतिशत कन्विंस हूं जो दर्शक के तौर पर मैं देखना चाहती हूं. मैं वही काम करना चाहती हूं. मैंने बोल्ड सीन्स कभी नहीं किए है.आगे भी नहीं करूंगी. मेरी परवरिश ऐसी हुई है कि मैं ऐसी चीज़ों को लेकर सहज नहीं हूं. जो ऐसे सीन्स करते हैं मुझे उनसे कोई दिक्कत नहीं हैं. मैं सहज नहीं हूं इसलिए नहीं करती हूं.
अपने अब तक के सफर से कितनी संतुष्ट हैं?
एक दशक इंडस्ट्री में हो गए हैं. पीछे मुड़कर देखती हूं तो बहुत ख़ुशी होती है कि मैंने अपने टर्म्स पर अपना एक नाम बनाया है. मैं आउटसाइडर हूं. इस इंडस्ट्री के बारे में मुझे अता पता नहीं था. जो कुछ भी पाया खुद से पाया तो एक संतुष्टि होती है. निश्चित तौर पर अभी बहुत लंबा सफर तय करना है.

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