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कुर्सी गई तो दूसरे पर फोड़ रहे हार का ठीकरा


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संवाद सूत्र, मुंगेर : जिले में सात प्रखंडों का चुनाव परिणाम आ गया है। आठवें चरण के लिए बुधवार को मतदान होना है। अबतक आए परिणाम में 90 प्रतिशत मुखिया, जिला परिषद, सरंपच, पंसस, वार्ड सदस्य और पंचों की कुर्सी चली गई है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाला परिणाम जमालपुर का रहा। यहां के दस पंचायत में हुए मतदान में सभी मुखिया जी कुर्सी से बेदखल हो गए। जिला परिषद सदस्य भी कुर्सी बचाने में सफल नहीं रहें। अब बरियारपुर प्रखंड से आने वाले परिणाम पर सभी की नजर है। प्रखंडों से आए परिणाम में ज्यादातर को जनता ने बाय-बाय कह दिया है। इस बार लोगों ने ग्राम-सरकार के चुनाव में गांव के विकास के लिए नए चेहरों पर अधिक भरोसा जताया है। जनता ने गांव की सरकार चुनने के लिए विकास के मुद्दे को अधिक प्राथमिकता दी है और इसी कारण से इस बार चेहरों की बदलने की रणनीति पर काम किया गया है। --------------------------- जागरुकता का असर, समझ रहे विकास का स्वरूप बुद्धिजीवियों का कहना है की अब ग्रामीण जागरूक हो गए हैं। अब लोगों की उम्मीदें और अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। गांव के लोगों को भी अपने इलाके में हाइटेक सुविधाएं चाहिए। ऐसे में अब ग्रामीण विकास के लिए जात-पात से ऊपर उठकर अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। यही वजह है कि इस बार काम नहीं करने वाले जनप्रतिनिधियों को दोबारा मौका नहीं मिला। नल-जल योजना को वार्ड सदस्य के मत्थे मढ़ने के चक्कर में सेल्फ गोल कर वर्तमान मुखिया बैठे हैं। --------------------- योजना भी बनी बड़ी वजह ग्रामीण राजनीतिक चाणक्य की माने तो नल-जल व शौचालय योजना वर्तमान मुखियाओं के लिए गले की हड्डी बन गई। नल-जल योजना को वार्ड सदस्यों के मत्थे मढ़ने व शौचालय योजना में कमीशनखोरी के चक्कर में मुखिया जी सेल्फ गोल कर बैठे थे। इसलिए चाहे वो कितने रणनीति बदले हार तय हो गयी। क्योंकि जब लोग शिकायत लेकर पहुंचते थे तो मुखिया का एक ही जबाब होता था वार्ड सदस्य इसके जिम्मेदार है। इसमें हम कुछ नहीं कर सकते है।

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