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मत्स्यपालन के जरिए आत्मनिर्भर होगी कोसी की महिलाएं

कुंदन कुमार, सहरसा : कोसी क्षेत्र में नीली क्रांति योजना के तहत मत्स्यपालन के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में जहां सामान्य वर्ग को नया तालाब, रेयरिग तालाब और आद्रभूमि के विकास के लिए 40 फीसद अनुदान दिया जा रहा है। वहीं मत्स्यपालन के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 60 फीसद अनुदान का प्रावधान किया गया है। कोसी क्षेत्र में मत्स्यपालन की व्यापक संभावना को देखते हुए तैयारी शुरू कर दिया गया है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र प्रायोजित योजना के साथ मुख्यमंत्री मत्स्य विकास योजना से भी महिला मत्स्यपालकों को जोड़ने की तैयारी चल रही है।


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उन्नत किस्म का बीज भी तैयार करेगी महिलाएं
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क्षेत्र में महिलाओं को न सिर्फ मत्स्यपालन का मौका दिया जाएगा, बल्कि महिलाएं रेहु, कतला, नैनीग्रास आदि उन्नत प्रजाति की मछली का बीज उत्पादन किया जाएगा। इसके लिए भी महिलाओं को लागत पर 50 फीसद इनपुट अनुदान दिया जाएगा। इससे इलाके में मत्स्य बीज की भी समस्या दूर होगी। तालाब में पानी की कमी नहीं हो इसके लिए बोरिग व पंपसेट भी अनुदान पर उपलब्ध कराया जाएगा।
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मत्स्यपालन के लिए दिया जाएगा प्रशिक्षण
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विभाग अन्य मत्स्यपालकों के साथ महिला मत्स्यपालकों को भी प्रशिक्षण योजना से केंद्रीय मात्सिकी जिला संस्थान उपकेंद्र कोलकाता, मात्सि्यकी महाविद्यालय उत्तराखंड मत्स्य प्रशिक्षण केंद्र मीठापुर, कालेज आफ फिसरीज किशनगंज आदि जगहों पर ले जाकर वहां किए जा रहे मत्स्यपालन से अवगत कराकर प्रशिक्षित करेगा, ताकि आनेवाले दिनों में इस इलाके में भी बेहतर किस्म के मछली का उत्पादन किया जा सके। ---------------
कोसी क्षेत्र में मत्स्यपालन की व्यापक संभावना को देखते हुए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा अनेक योजनाएं चलाई जा रही है। इस इलाके में कुछ जगह महिलाएं मत्स्यपालन में सक्रिय भी है। कई योजनाओं में महिलाओं को विशेष अनुदान देने का प्रावधान है। इससे इलाके की महिलाएं आत्मनिर्भर होगी।
अंजनी कुमार
जिला मत्स्य पदाधिकारी, सहरसा।

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