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अपराध और नक्सल की दंश में पिसता रहा है खैरा

संवाद सहयोगी, जमुई: पहाड़, जंगल से घिरा खैरा प्रखंड नक्सली और आपराधिक वारदात के दंश में पिसता रहा है। झारखंड के बार्डर से सटे होने का फायदा नक्सली और अपराधी उठाते हैं। घटना को अंजाम देने के बाद वो झारखंड निकल जाते हैं। खैरा में ही पहली बार नक्सलियों ने घटना को अंजाम देकर जिले में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। आज से दो दशक पहले 1998 में खैरा के दीपाकरहर में विस्फोट कर ट्रैक्टर को उड़ा दिया था इसमें मतदान कर्मी सवार थे। इसके बाद 2002 को लछुआड़ काली पूजा मेला में पुलिस कर्मियों को घायल कर तीन राइफल लूट लिया था। इसी साल रोपावेल में एक मुखिया की हत्या कर दी। नक्सल वारदात के अलावा इस क्षेत्र में अपराधियों के हौंसले भी बुलंद रहे हैं। इस वर्ष अप्रैल से मई माह के बीच दो घटना को अंजाम दिया गया है। वर्ष 2020 के अक्टूबर से नवंबर माह के बीच पांच लोगों की हत्या हुई थी।

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इस वर्ष तीन अप्रैल को गोपालपुर गांव में रंजीत ने अपनी पत्नी सुनैना देवी की हत्या गला दबाकर कर दी थी। इसके बाद 28 मई को केंडीह पंचायत के बल्लोपुर गांव में अपराधियों ने मो. इजरायल खां के पुत्र मो. अमजल खान को गोली मारकर घायल कर दिया था।
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दो माह में पांच की हुई हत्या
वर्ष 2020 में दो माह अक्टूबर और नवंबर में पांच लोगों की हत्या कर दी गई। 11 अक्टूबर को पंचायत के मुड़वरो गांव निवासी जलील मियां के पुत्र मेहराबुल अंसारी की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। इसी महीने 20 अक्टूबर को मानपुर गांव में भूमि विवाद में मारपीट में घायल नीरू यादव और पुत्र राजेंद्र यादव की इलाज के दौरान मौत हो गई। 27 अक्टूबर को झूंडो गांव में प्रतिला देवी की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई। एक नवंबर को दो दर्जन नकाबपोश अपराधियों ने अरूणाबांक गांव निवासी मुंद्रिका यादव के घर पर हमला कर दिया। मुखिया के नहीं मिलने पर उसके पुत्र अंकित की गोली मार कर हत्या कर दी थी।

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