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नौ हजार लाभुकों को है किस्त की राशि का इंतजार (जागरण विशेष)

जागरण संवाददाता, सुपौल : प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण मामले में जिला यूं ही सूबे में आखिरी पायदान पर नहीं है। कई ऐसे लाभुक हैं जिन्हें योजना के तहत मिलने वाली राशि का इंतजार है। राशि नहीं मिलने के कारण इसका प्रभाव योजना की प्रगति पर देखने को मिल रहा है। सरकार द्वारा करीब एक माह से इस मद में राशि नहीं दी गई है। जिले में 9128 ऐसे लाभुक हैं जो प्रथम द्वितीय या तृतीय किस्त के इंतजार में हैं। राशि नहीं मिलने के कारण ऐसे लाभुकों का आवास पूर्ण नहीं हो पा रहा है। ऐसे लाभुक विभाग और सरकार की तरफ टकटकी नजर गड़ाए हुए हैं।

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दरअसल वित्तीय वर्ष 2016-17 में सरकार ने गरीबों को आवास देने वाली इस योजना में बड़ा बदलाव किया। बदलाव के दौरान न सिर्फ योजना का नाम इंदिरा आवास से बदलकर प्रधानमंत्री आवास योजना किया गया बल्कि मिलने वाली राशि में भी बदलाव किए गए। तब से लेकर अब तक जिले में 84587 लाभुकों को इस योजना के तहत प्रथम किस्त दी गई है। इनमें से कई लाभुकों ने किस्त के अनुकूल कार्य भी कर लिया परंतु अगली किस्त नहीं मिलने के कारण निर्माण कार्य ठप पड़ा हुआ है। इनमें से करीब दो हजार ऐसे लाभुक है जिन्हें योजना के तहत चयन कर सारी प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। परंतु उन्हें अब तक प्रथम किस्त नहीं मिल पाई है। शेष बचे लाभुक को दूसरी और तीसरी किस्त का इंतजार है। परिणाम है कि जिले में इस योजना को जो गति मिलनी चाहिए थी वह नहीं मिल पाई है। हाल के दिनों में विभाग द्वारा जब योजना की समीक्षा की गई तो सुपौल का स्थान सूबे में सबसे नीचे रहा।
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नहीं हो पा रहा आवास निर्माण
पिछले करीब एक माह से इस योजना में राशि नहीं दिए जाने के कारण जिले के 9128 ऐसे लाभुक हैं जिन्हें किस्तों का इंतजार है। किस्त नहीं मिलने के कारण ऐसे लाभुक आवास निर्माण कार्य नहीं कर पा रहे हैं। इनमें से कई ऐसे लाभुक हैं जिनका चयन महीनों पूर्व कर लिया गया है लेकिन उन्हें प्रथम किस्त की राशि नहीं दी गई है। इसी तरह कुछ ऐसे लाभुक भी शामिल हैं जिन्होंने प्रथम किस्त के अनुकूल काम कर लिया है परंतु द्वितीय किस्त नहीं मिलने के कारण वह आगे का काम नहीं कर पा रहे हैं।
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लक्ष्य पूरा कर पाना संदेहास्पद
सरकार ने 2024 तक हर गरीब को पक्का मकान मुहैया कराने का लक्ष्य अख्तियार कर रखा है लेकिन जिले में योजना की गति को देखकर लगता नहीं कि समय से लक्ष्य को पूरा किया जा सकता है। वैसे भी जिले में योजना की गति कछुए की चाल चल रही है। एक तो शत-प्रतिशत लाभुकों को समय से राशि नहीं मिल पा रही है तो दूसरी तरफ जिन लाभुकों को राशि दी जाती है वह राशि के अनुकूल निर्माण कार्य नहीं कर पाते हैं। स्थिति है कि जिले में हर वर्ष आवास पूर्ण नहीं करने वाले लाभुकों की संख्या में इजाफा ही होता जा रहा है। हालांकि विभाग ऐसे लाभुकों पर समय-समय पर कार्रवाई भी करती है। बावजूद इस योजना को जो गति मिलनी चाहिए थी वह अब तक नहीं मिल पाई है।
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कई ने कर्ज लेकर आवास किया पूर्ण
किस्त से वंचित कई लाभुकों ने बताया कि वे लोग कर्ज लेकर आवास निर्माण कर लिए हैं। लेकिन राशि नहीं मिलने के कारण अब उन लोगों को साहूकारों का तगादा सहना पड़ रहा है। ऐसे लोगों का कहना है कि वर्षा मौसम को देखते हुए वे लोग कर्ज लेकर घर का निर्माण कार्य कर लिया। सोचा था कि जब किस्त की राशि मिलेगी तो कर्ज चुकता कर दिया जाएगा।
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रैंकिग में सुपौल का स्थान सबसे नीचे
ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना की जारी रैंकिग में सुपौल का स्थान सूबे में सबसे निचले पायदान पर है। वित्तीय वर्ष 2016-17 से लेकर 2021-22 तक के प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्राम सभा से पारित, पोर्टल पर अपलोड, आधार लिकिग, स्वीकृति, प्रथम, द्वितीय और तृतीय किस्त के भुगतान और आवास पूर्णता के आधार पर रैंकिग की गई जिसमें सुपौल का स्थान सूबे में सबसे नीचे 38 वे पायदान पर रहा है।

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