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मोइन धार की बदल सकती है तस्वीर

चंदन सिंह, जागरण संवाददाता, खगड़िया : सरकार ने जलश्रोतों के जीर्णोद्धार के लिए कई योजनाएं बनाई है। दूसरी ओर जिला मुख्यालय स्थित मोइन धार सूखती चली जा रही है। इसका अस्तित्व समाप्त हो रहा है। लेकिन अब इसके जीर्णोद्धार के लिए प्रयास होने वाला है। डीडीसी संतोष कुमार ने कहा कि मोइन धार का अवलोकन कर इसके जीर्णोद्धार की दिशा में प्रयास किया जाएगा। जबकि डीआरडीए के निदेशक शहादत हुसैन ने बताया कि मोइन धार की स्थिति का गहन अवलोकन किया जाएगा। विभागीय पीओ को निर्देशित किया गया है। पीओ की रिपोर्ट के बाद आगे प्रयास किया जाएगा। मालूम हो कि मोइन धार पर अपनी जरूरतों के हिसाब से स्थानीय लोगों ने अवैध कब्जा भी कर लिया है। यह अतिक्रमण सुरसा की मुंह की तरह बढ़ता ही जा रहा है। यहां से गाद निकालने का कोई प्रयास कभी नहीं हुआ। इसलिए यह उथली होती चली गई। धीरे-धीरे भरता चला गया। अब तो बस वर्षा के मौसम में ही बचे हुए भाग में पानी रहता है। अगर इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो अगले 10 वर्षों में मोइन धार का अस्तित्व ही नहीं बचेगा। 81 वर्षीय नागेश्वर प्रसाद सिंह बताते हैं कि यह धार अंग्रेजों के समय से ही सरकारी थी। आजादी के बाद अतिक्रमण का शिकार हो गई। एक समय यह साइबेरियन पक्षियों का बसेरा हुआ करता था। अब तो यहां शीत ऋतु में गिने-चुने साइबेरियन पक्षी आते हैं। सरकार ध्यान दें, तो यह पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है। स्थानीय पंकज कुमार पासवान बताते हैं कि कभी यहां बहुतायत में कमल खिलते थे। करीब 20 एकड़ का जलीय भाग कमल के फूलों से ढंका रहता था। अब एक से दो एकड़ में कमल खिलते हैं। यहां की मछलियां भी अपने स्वाद के लिए विख्यात है। मोइन धार पर से अतिक्रमण हटाकर और गाद निकाल कर इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर सकते हैं।


खैर, अगर इसका जीर्णोद्धार हो जाए और यहां से अतिक्रमण हटाकर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए, तो राजेंद्र सरोवर उद्यान के नष्ट होने से जो कमी आई है उसे पूरा किया जा सकता है।

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