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आसमान में घुमड़ते बादल, लोगों की आंखों में बदरा

संस, सहरसा: मानसून आने के एक सप्ताह के बाद जैसे ही बारिश शुरू हुई यहां के अधिसंख्य लोगों के माथे पर चिता की लकीरें और आंखों में बदरा दिखने लगा है। दरअसल बीते पांच सालों से जलजमाव का दंश झेल रहे कई मुहल्ले एक बार फिर संकट में हैं।

विगत चार वर्षों में जलनिकासी पर करोड़ों खर्च किए जाने के बाद भी शहर पानी-पानी हो गया है। चार महीने से जलनिकासी के लिए नगर परिषद और जिला प्रशासन की तैयारी फिलहाल विफल दिख रही है।
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60 करोड़ नाले पर खर्च
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नालियों के निर्माण पर वुडको, नगर परिषद, पथ निर्माण विभाग द्वारा लगभग 60 करोड़ की खर्च की गई राशि बेअसर दिख रही है। शहर के लगभग सभी मुहल्ले में पहली ही वर्षा में पानी जमा हो गया है। मंगलवार, बुधवार और शुक्रवार को हुई बारिश ने शहर की स्थिति नारकीय हो गई है। मौसम विभाग द्वारा इस वर्ष भारी बारिश की संभावना व्यक्त की गई है। ऐसे में सहरसा नगर के लोग सहमे हुए हैं।
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चार वर्ष में पूरा नहीं हो सका वुडको का जलनिकासी कार्य
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वर्ष 2017 की बारिश में सहरसा नगर की स्थिति बाढ़ जैसी हो गई थी। कोई भी मुहल्ला इस लायक नहीं बचा था, जहां आसानी से आवागमन किया जा सके। तत्कालीन जिलाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल ने इसके लिए सरकार को त्राहिमाम संदेश भेजा। सरकार के दो बड़े अधिकारी तत्काल सहरसा भेजे गए और उनके प्रतिवेदन पर तीन दिन के अंदर वुडको की टीम सहरसा पहुंची।
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2020 में ही बनना था नाला
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प्रथम चरण में 54 करोड़ की लागत से जलनिकासी का प्लान बनाया गया। इस कार्य को दिसंबर 2020 में ही पूरा किया जाना था, जो अबतक पूरा नहीं हुआ। कई इलाके में नाला का निर्माण व दोनों संप हाउस का निर्माण अबतक पूरा नहीं किया गया। फलस्वरूप इतनी राशि खर्च होने के बाद शहर के लोग जलक्रीड़ा के लिए मजबूर हैं।
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सूक्ष्मस्तरीय प्लान भी साबित होने लगा बेअसर
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जिला प्रशासन विगत चार महीने से सहरसा शहर की जलनिकासी के प्रयास में जुटा है। बावजूद कोई ठोस प्रतिफल निकलकर नहीं आ पाया। मानसून पूर्व अप्रैल और मई माह की बारिश में ही नगर के सभी मोहल्ले में पानी लग गया। यह हाल पहली बारिश में है। पंपसेट से भी पानी निकाला जाने लगा, परंतु जलनिकासी की स्थिति बेहद चिताजनक है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
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बारिश होने के बाद जमा पानी की निकासी शीघ्र कैसे किया जाए, इसके लिए माइ्रक्रोप्लान बनाया गया है। इसका लाभ भी मिल रहा है। इसे और कैसे बेहतर बनाया जाए, इसके लिए जिलाधिकारी के निर्देशन में लगातार पर्यवेक्षण जारी है।
प्रदीप कुमार झा
सदर, एसडीओ, सहरसा।

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