मखाना का उत्पादन कर लाखों की कमाई कर सकते हैं किसान : डा. मिथिलेश



संवाद सूत्र, मधेपुरा : मखाना तालाब, झील व दलदली क्षेत्र के शांत पानी में उगने वाला पोषक तत्वों से भरपूर एक जलीय उत्पाद है। मखाने के बीज को भूनकर इसका उपयोग मिठाई, नमकीन व खीर आदि बनाने में होता है।
मखाना में 9.7 प्रतिशत आसानी से पचने वाला प्रोटीन, 76 प्रतिशत कार्बोहाईड्रेट, 12.8 प्रतिशत नमी, 0.1 प्रतिशत वसा, 0.5 प्रतिशत खनिज लवण, 0.9 प्रतिशत फास्फोरस व प्रति 100 ग्राम 1.4 मिलीग्राम लौह पदार्थ मौजूद होता है। इसमें औषधीय गुण भी होता है। इसलिए राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग काफी है। अगर किसान वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती करेंगे तो उन्हें लाखों में कमाई होगी। उक्त बातें कृषि विज्ञान केंद्र, मधेपुरा के वीडियो कांफ्रेंसिग कक्ष में शनिवार को मखाना विकास योजना अंतर्गत मखाना उत्पादन तकनीक विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में मौजूद किसानों को संबोधित करते हुए शस्य वैज्ञानिक सह समन्वयक डा. मिथिलेश कुमार राय ने कही। उन्होंने मखाना पौधशाला से मुख्य खेत में मखाना पौधों की रोपाई एक अन्य शस्य क्रियाएं से संबंधित वैज्ञानिक विधि के बारे में विस्तार पूर्वक चर्चा की। मौके पर मौजूद डा. शशि प्रकाश विश्वकर्मा ने मखाना में उर्वरक प्रबंधन के बारे में डा. सुनील कुमार ने मखाना सह मछली पालन व राहुल कुमार वर्मा ने मखाना मूल्य संवर्धन विषय पर प्रकाश डाला। साथ ही बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर के मखाना उत्पादन तकनीक पर बड़ी फिल्म के माध्यम से भी प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में नेहा कुमारी, रूबी कुमारी, किशन कुमार, विकास कुमार समेत विभिन्न प्रखंडों के 25 किसान मौजूद थे।

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