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सारण के स्वतंत्रता सेनानी गिरिश तिवारी के गांव का नहीं हुआ विकास

सारण के स्वतंत्रता सेनानी गिरिश तिवारी के गांव का नहीं हुआ विकास

सारण। देश में स्वतंत्रता की लड़ाई व 1930 के नमक सत्याग्रह आंदोलन में अग्रणी रहने वाले सारण जिले के मांझी प्रखंड का बरेजा गांव आज भी विकास से कोसों दूर है। बरेजा स्वतंत्रता सेनानी पंडित गिरिश तिवारी व सवलिया बाबू का गांव है। इसके बाद भी यह पूरी तरह से उपेक्षित है। आलम यह है कि आजादी के करीब तीन दशक बाद यहां मिडिल स्कूल को ही उत्क्रमित कर हाई स्कूल खुला। अब वह प्लस टू स्कूल हो गया है। इस बरेजा गांव को महाराजगंज के सांसद ने गोद भी लिया था, इसके बावजूद भी इस गांव का अपेक्षित विकास नहीं हो सका। इसको लेकर गांव के लोगों को इसकी काफी टीस है। वे कहते हैं कि स्वतंत्रता के आंदोलन में अपना सबकुछ न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानी के गावं का काफी विकास होना चाहिए था, लेकिन यहां कुछ भी विशेष नहीं है। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ 1929 के लाहौर के कांग्रेस अधिवेशन में पं. जवाहर लाल नेहरू की अध्यक्षता में देश के पूर्ण स्वाधीनता का प्रस्ताव पास हुआ तो महात्मा गांधी ने पूर्ण स्वाधीनता के प्रस्ताव के आलोक में 1930 में नमक बनाकर कानून तोड़ने के लिए आंदोलन शुरू किया। बरेजा गांव में चार नवंबर 1930 को पं. नेहरू, सरदार बल्लभ भाई पटेल, डा राजेन्द्र प्रसाद, स्थानीय पं. गिरीश तिवारी, रामराजेश्वर प्रसाद तिवारी उर्फ सवलियाजी के नेतृत्व में नमक कानून तोड़कर नमक बनाया गया। आज उस गांव की सुध लेने वाला कोई नहीं है। सांसद सिग्रीवाल ने बरेजा गांव को लिया था गोद 2014 में प्रधानमंत्री के आह्वान पर स्वतंत्रता सेनानी के गांव को आदर्श ग्राम योजना के तहत महराजगंज के सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने जब महान स्वतंत्रता सेनानी पं. गिरीश तिवारी व सवालिया बाबू की जन्मभूमि बरेजा पंचायत को गोद लेने की घोषणा की, तब पंचायत वासियों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई। एक आस बंधी कि वर्षों से उपेक्षित उनकी पंचायत का विकास बहुत होगा। सांसद ने अपनी घोषणाओं में कहा था कि एक वर्ष में कम से कम नौ दिन यहां रात्रि विश्राम कर लोगों की समस्याओं को सुनेंगे और विकास कार्यों की स्वयं समीक्षा करेंगे। वर्तमान स्थिति में आदर्श ग्राम बरेजा में चार नए विद्युत ट्रांसफार्मर तो लगे हैं, लेकिन पोल और तार की हालात जर्जर है। आज भी बरेजा गांव की सड़कों व गलियों में नाले का पानी बहता है। नमक सत्याग्रह पथ पूर्व की तरह है। विद्यालय है, लेकिन शैक्षणिक व्यवस्था नहीं है। शिक्षक का अभाव है। आज भी गांव की सड़कों के किनारे महिला-पुरुष शौच करते है। ओडीएफ केवल कागजों पर है। स्वास्थ्य केंद्र का अभाव है। सड़क की हालात बदतर बनी हुई है। जलमीनार व स्टेडियम के लिए पंचायत में जमीन उपलब्ध कराने के बावजूद काम शुरू नहीं हुआ। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से मिलने वाली पेंशन लंबित है। अजा बस्ती में कार्यशाला भवन के लिए स्थल चयन के बाद भी लंबित है। एक सर्वे के अनुसार बरेजा में 66 ऐसे परिवार हैं, जो बेघर हैं। विगत वर्ष बरेजा में आयोजित डीएम के जनता दरबार में ग्रामीणों द्वारा अपनी मांगों व समस्याओं को लेकर करीब 300 से अधिक आवेदन दिए गये थे, जिसका निष्पादन विभाग के पास पड़ा रह गया। सांसद मद से पांच लाख की लागत से हुआ है पोखरे का निर्माण पंचायत के मुखिया राजेश पाण्डेय ने बताया कि अभी तक सांसद मद से उच्च विद्यालय बरेजा के समीप स्थित पोखरे के घाट का निर्माण लगभग चार से पांच लाख रुपये की लागत से कराया गया है। स्वास्थ्य केंद्र के लिए भी अभी तक कोई विभागीय प्रयास नहीं किया गया। बरेजा को गोद लेने के बाद आजतक पंचायत में सांसद द्वारा रात्रि विश्राम नहीं किया गया। अबतक हुए कार्यों में बरेजा पंचायत के बभनवालिया गांव में मनरेगा के तहत दो लाख 71 हजार की लागत से पोखरा का जीर्णोद्धार व एक यूनिट पौधारोपण कराया गया, लेकिन आज एक भी पौधा व वृक्ष नहीं दिखते हैं। ग्रामीण प्रमोद कुमार गिरी, शैलेन्द्र सिंह, गणेश पाण्डेय, नीरज मिश्रा, रंजन यादव आदि लोगों ने बताया कि नेता और विभागीय अधिकारियों के उदासीन रवैये के कारण बरेजा में विकास कार्य शिथिल पड़ा है।

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