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नगर परिषद की दुकानों पर हो रहा अवैध निर्माण, अधिकारियों की चुप्पी



संवाद सहयोगी, किशनगंज : नगर परिषद के रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लोगों को उपलब्ध कराई गई दुकानों को लोगों ने अपनी निजी संपत्ति बना लिया है। इसके साथ ही धड़ल्ले से अतिक्रमण का दौर भी जारी है। कई रसूखदारों और राजनीतिक पहुंच रखने वालों के करीबियों को दुकान देने के बाद इन दुकानों में लगातार बीना आदेश के अतिक्रमण जारी है।
सरकारी अधिकारी भी अपनी जिम्मेवारियों से किनारा कर इस अनैतिक कार्य को हरी झंडी देते दिख रहे हैं। नियमत: नगर परिषद द्वारा प्रदत्त दुकानों में बिना अनुमति के किसी प्रकार के निर्माण कार्य को कानून के विरुद्ध माना गया है। इसके बावजूद कानून को चुनौती देते निर्माण के अलावा दुकानों को दूसरे को भाड़े पर देकर भारी मात्रा में भाड़े की उगाही का खेल भी जारी है। नगर परिषद क्षेत्र के अंतर्गत कुल 11 स्थानों में लोगों को दुकान दिया गया है। नगर परिषद के इन क्षेत्रों में दुकानों का आकार 40 से लेकर 152 स्कवैयर फिट के हैं। इनके लिए भाड़े के तौर पर मात्र आठ रुपए की फिट की दर से वसूली की जाती है।

नगर परिषद के कर से वसूली व क्षेत्र में विकास कार्य कराने के लिए इन पैसों के इस्तेमाल के लिए संपत्ति कर व अपनी संपत्ति को बढ़ाने का अधिकार दिया गया था। लेकिन इस संपत्ति को लोगों ने अपनी निजी संपत्ति बना रखा है। आलम यह है कि नियमों की कर अवहेलना की जा रही है। सुपूर्द किए गए दुकानों पर किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य से पूर्व आवेदन देकर निर्माण निर्देश लेने के नियम की अवहेलना बदस्तूर जारी है। जबकि बाजार दर से कर में भारी छूट दिया जा रहा है। बीना आदेश निर्माण पर है पाबंदी
नगर परिषद द्वारा रोजगार करने के लिए दिए गए दुकानों पर बिना नगर परिषद के आदेश के कोई निर्माण कराना वैसै ही गैर कानूनी है, जैसे आपकी निजी संपत्ति पर कोई निर्माण कार्य। इसके बावजूद इसका धड़ल्ले से उल्लंघन किया जा रहा है। कई दुकानदारों ने दुकान की चौहद्दी के दायरे को बढ़ा अतिक्रमण कर लिया है। इसके कारण लोगों को जाम की समस्या से जूझना पड़ रहा है। वहीं कई दुकानो में टाइल्स मार्बल के साथ ही बेहतर सुविधा का विस्तार कर सरकारी जगह का अतिक्रमण कर लिया गया है। बाजार दर से काफी कम भाड़े पर दिया जा रहा दुकान नगर परिषद के अंतर्गत दिए गए दुकानो को काफी कम दर पर दिया जाता है। लोगों को रोजगार मुहैया कराने के इरादे से दिए गए दुकानों पर मामूली कर के तौर पर दो सौ 16 रुपए से लेकर ए्क हजार 32 रुपए के तक है। वहीं नगर परिषद के सामने कई दुकानदारों ने अपने निश्चित आकार पर बदलाव कर निर्माण को नया स्वरूप दे दिया है। इसके कारण लोगों को जाम के साथ चलने तक के लिए समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कई दुकानों को अधिकतम भाड़े पर दे कमाई की जा रही
राजनीतिक रसूख वाले लोगों ने दुकानों का आवंटन अपने नाम पर लेकर लोगों को भाडे पर दे रखा है। जो पूर्ण रूप से गैरकानूनी है। इसके लिए आवंटी माटी रकम की वसूली उक्त लोगों से करते हैं। जहां निजी भूमि पर बने दुकानों की दर 10 हजार है वहां मात्र एक हजार नगर परिषद कर अपना दुकानों पर कर लगा रही है।

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