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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आज, सारण में घर-घर आएंगे लड्डू गोपाल

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आज, सारण में घर-घर आएंगे लड्डू गोपाल

सारण। भादो मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनायी जाती है। इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 19 अगस्त को है। जन्माष्टमी को लेकर मंदिर और बाजार में रौनक छाई है। मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। नैनी के द्वारिकाधीश मंदिर को आकर्षक तरीके से सजाया जा रहा है। बाजार में गुरुवार को बड़े से लेकर छोटे दुकानों पर श्रीकृष्ण के छोटे से लेकर बड़े रूप में मूर्तियां, लड्डू गोपाल की पालकी, आसन,श्रृंगार के सामान, मोरपंख, माखन, मिश्री एवं अन्य सामान खरीदने वालों की भीड़ लगी है। कलात्मक गहनों की विशेष मांग : भगवान के कलात्मक गहनों की विशेष मांग है। सजाने के लिए खिलौने भी बाजार में उपलब्ध हैं। पीतल के लड्डू गोपाल,एलईडी पालना,पीतल की बांसुरी की सामान की बिक्री हो रही है। दुकानों में लड्डू गोपाल, बांसुरी बजाते भगवान श्रीकृष्ण, माखन खाते कान्हा, मोर पंख धारण किए कान्ह, राधा-कृष्ण व अन्य मूर्तियां भक्तजन खरीद रहे हैं। कई डिजाइन के झूले भी आकर्षण का केंद्र बने हैं। भगवान श्रीकृष्ण के श्रृंगार के सामान में पोशाक की पगड़ी, माला, बांसुरी, कुंडल व अन्य सामान है। पसंद किए जा रहे लड्डू गोपाल का सिंहासन: बाजार में जगह -जगह विभिन्न रंग और डिजाइन में सामान आकर्षित कर रहे हैं। अलग अलग साइज में कान्हा की मूर्तियां बिक रही हैं। एक सौ से 1600 रुपये तक की कीमत में बिक रहे हैं। लड्डू गोपाल का सिंहासन 100 से 500 रुपये तक बिक रहे हैं। लड्डू गोपाल की पोशाक 20 रुपये से लेकर 200 रुपये तक, बांसुरी 10 से 30 रुपये तक, मुकुट पांच से 50 रुपये तक, मुकुट पांच से 50 रुपये तक वहीं मोर पंख भी दस से 20 रुपये तक बेचे जा रहे हैं। लड्डू गोपाल की मूर्ति की पूजा करने से होता लाभ जासं, छपरा : इस बार श्रीकृष्ण जन्माआष्टमी में कई प्रकार के योगों का दुर्लभ संयोग बन रहा है। भरत मिश्र संस्कृत महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डा.अंबरीश कुमार मिश्र ने बताया कि हमारे धर्मग्रंथो में अनेक व्रत हैं जिनका फल एवं महत्त्व भी शास्त्रों में वर्णित है, परंतु इन संपूर्ण व्रतों में कृष्ण जन्माष्टमी व्रत सबसे अधिक फलदायी एवं महत्वपूर्ण है। इस वर्ष अष्टमी पर स्थायीजययोग त्रिपुष्करयोग आदि योग है। इस योग में पुत्र की इच्छुक लोग ऊँ क्लीं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते, देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत: क्लीं ऊँ। मंत्र एक माला या यथाशक्ति जप भगवान कृष्ण की लड्डू गोपाल की मूर्ति का ध्यान करते हुए करना चाहिए। व्रत की पारणा तिथ्यन्ते चोत्सवान्ते च व्रती कुर्वीत पारणम् अर्थात तिथि के समापन होने पर अथवा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को बाहर बजे रात में मनाने के बाद किया जायेगा। विशेष रूप से इस बार की श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत विशेष फलदायी है।

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