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अभियान : कृष्ण जन्माष्टमी पर बाजार में रौनक, जोर शोर से हो रही तैयारी

अभियान : कृष्ण जन्माष्टमी पर बाजार में रौनक, जोर शोर से हो रही तैयारी

बेतिया । कृष्ण जन्माष्टमी में अभी तीन दिन की देरी है, लेकिन इसकी तैयारी शुरू हो गई है। मंदिरों में जन्माष्टमी की तैयारी जोर-शोर से हो रही है।कोविड-19 की बंदिसे खत्म होने के बाद पर्व को लेकर लोगों में काफी उत्साह है। हर साल की तरह ही इस साल भी श्रीकृष्ण मंदिरों में भव्य पूजा व आरती होगी। मंदिरों के पुजारी और भक्त पूरे विधि-विधान से मध्य रात्रि में भगवान श्री कृष्ण की पूजा करेंगे व जन्मोत्सव मनाएंगे। कृष्ण भक्तों सहित सभी लोगों के लिए जन्माष्टमी व्रत के साथ कृष्णावतार महत्वपूर्ण है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी भाद्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। पर्व को लेकर बाजार में रौनक बढ़ गई है। जन्माष्टमी पर झांकी सजाने और इससे जुड़े सामान बेचने वाले दुकानदार काफी खुश है। इस अवसर पर उन्हें अच्छे कारोबार होने की उम्मीद है। कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर गांवों में डोल रखने को लेकर युवाओं में काफी उत्साह है। गांवों में भक्त भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति रख पूजा पाठ और भजन कीर्तन करते हैं। इसे गांवों में डोल कहा जाता है। मूर्तिकार ङ्क्षबदेश्वरी पडित ने बताया कि जन्माष्टमी पर भक्त भगवान श्री कृष्ण और गणेश जी की पूजा करते हैं। श्री कृष्ण और भगवान गणेश की मूर्ति के लिए कुछ आर्डर मिले हैं। मूर्तियों का निर्माण अंतिम चरण में है। झांकी के समान विक्रेता अजय कुमार ने बताया कि इस साल श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर अच्छे कारोबार की उम्मीद है। कोविड-19 के कारण पिछले दो वर्षों से बिक्री काफी मंदा रहा है। लेकिन इस बार ऐसी स्थिति नहीं है। लोग अभी से ही खरीदारी करने के लिए दुकान पर आ रहे हैं। आचार्य पं. राधेश्याम पाठक ने बताया कि इस दिन विधि-विधान से भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इस दिन पूजा करने से नि:संतान दंपतियों को संतान की प्राप्ति होती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष रूप से सूर्य, सोम, यम, काल, संधि, भूत, पवन, दिक्पति, भूमि, आकाश, खेचर, अमर, ब्रह्मादि को नमस्कार करें और पूर्व या उत्तर की तरफ मुख करके बैठें। इसके बाद विधि-विधान से भगवान कृष्ण का पूजन करें। जन्माष्टमी के दिन लोग एक दिन का उपवास रखते हैं। भगवान के जन्म के पश्चात व्रती जश्न मनाते हैं। इसके बाद लोग अपना व्रत तोड़ते हैं। पूजा मध्यरात्रि के बाद शुरू होती है, जब भगवान कृष्ण की प्रतिमा को स्नान कराया जाता है। इसके बाद प्रभु को नए वस्त्र पहनाकर पालने में बैठाया जाता है और भक्ति गीत गाकर उनकी पूजा की जाती है। भगवान को चूरन, फल, मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थ प्रसाद के रूप में चढ़ाए जाता है। इसके बाद भोग का प्रसाद ग्रहण कर व्रती अपना व्रत तोड़ते हैं।
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