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राम मंदीर निर्माण में बिहार से रखा गया है पहला ईंट, जानें कब और किसने रखा नींव

07 Feb, 2020 09:48 AM | Saroj Kumar 2213

जहां एक तरफ दिल्ली में होने वाला चुनाव चर्चे में हैं. तो दूसरी तरफ राम की जन्मस्थली अयोध्या में राम मंदीर के निर्माण की चर्चा आज-कल सबकी जुवां पर है. बजट सत्र के दौरान लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने जैसे ही राम मंदीर निर्माण के लिए ट्रस्ट का ऐलान किया. वैसे ही अयोध्या के राम और उनकी मंदीर निर्माण की चर्चा लोगों के जुवां पर सज गई.


दरअसल देश के दूसरे सबसे बड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदीर निर्माण पर सुनवाई के बाद केंद्र सरकार को आयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए एक ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया था. जो ट्रस्ट मंदीर निर्माण से जुडे फैसला करेगा.


वहीं कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने ट्रस्ट को लेकर फैसले किए औऱ बजट सत्र के दौरान लोकसभा में पीएम मोंदी ने ट्रस्ट बनाए जाने की घोषणा की जिसमें राजनीति क्षेत्र से संबंध नहीं रखने वाले कुल 15 सदस्यों वाली टीम होगी. वहीं पीएम मोदी के द्वारा ट्रस्ट का ऐलान होते ही यूपी में योगी सरकार अयोध्या ने मस्जीद के लिए 5 एकड़ भूमी देने का भी रास्ता साफ कर दिया है.


हालांकि राम मंदीर निर्माण में सबसे पहले पड़ने वाली इंट की चर्चा भी अब जोरो पर है. जानकारों का कहना है कि राम मंदीर निर्माण के लिए 9 नवम्बर 1989 को ही मदीर का शिलान्यास किया जा चुका है. जिसकी पहली ईंट बिहार से था. दरअसल राम मंदीर निर्माण के लिए हुए आंदोलन का अहम पड़ाव साल 1986 को माना जाता है. उस साल कोर्ट के आदेश पर राम मंदिर का दरवाजा खुला जो वर्षों से बंद पड़ा था. तब देश के धर्मगुरुओं ने तय किया कि आयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो. देशभर में मंदिर निर्माण के लिए शिलापूजन कार्यक्रम चला तो राम मंदिर का शिलान्यास कार्यक्रम भी उसी कड़ी में शामिल हुआ. इससे ठीक पहले कुंभ मेले में धर्मगुरुओं ने तय किया कि किसी दलित शख्स से ही राम मंदीर का शिलान्यास कराया जाएगा.


साल 1989 में जब शिलान्यास के लिए देश भर से कारसेवक जुटे तो सरकार के साथ खिचातानी शुरू हो गई. लेकिन वार्ता के बाद शिलान्यास कार्यक्रम तय हुआ. लेकिन कुंभ में तय विचारों के तहत अखिर कौन ऐसा था जो कि दलित समाज से हो और राम का भक्त हो जिसे शिलान्यास करने का सौभाग्य प्राप्त हो तभी बिहार से विश्व हिन्दू परिषद के सह संगठन मंत्री कामेश्वर चौपाल लोगों की नजरों में आए वह आयोध्या में मौजूद थे. जिनसे मिल धर्मगुरुओं ने पहली ईंट रखने को कहा. और इस तरह चौपाल ने राम मंदीर निर्माण में बिहार से पहला इंट रखने का भी श्रेय प्राप्त किया है.


24 अप्रैल 1956 को सुपौल में जन्में कामेश्वर चौपाल ने जेएन कॉलेज मधुबनी से स्नातक की परीक्षा पास कर मिथिला विवि दरभंगा से 1985 में एमए की डिग्री ली है. इस दौरान विहिप में शामिल रहे लेकिन 1989 में शिलान्यास प्रकरण के बाद कामेश्वर चौपाल विधिवत रुप से भाजपा में शामिल हो राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हो गए. जिसके बाद कामेश्वर चौपाल की लोकप्रियता को देखते हुए भाजपा ने साल 1991 में रोसड़ा सुरक्षित लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया.


हालांकि वे चुनाव हार गए. इसके बाद 1995 में वे बेगूसराय की बखरी विधानसभा सीट से भी चुनाव लड़े पर उन्हें वहां भी हार का सामना करना पड़ा. साल 2002 में वे बिहार विधान परिषद के सदस्य बने. 2014 तक वे विधान परिषद के सदस्य रहे साल 2009 में हुए चुनाव में उन्होंने रोटी के साथ राम का नारा बनाया था जो चर्चा में रहा. बीजेपी ने 2014 में कामत को गृह जिले सुपौल से लोकसभा का उम्मीदवार बनाया. लेकिन यहां भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा. हलांकि राजनीतिक गतिविधियों ने शामिल चौपाल को केंद्र सरकार के द्वारा गठित ट्रस्ट 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र' के 15 ट्रस्टी में शामिल हैं. जिसके बाद मंदीर में पहली ईंट बिहार की लोगों के जुबां पर खुब धूम रही है तो बिहारियों के लिए हर्ष की बात बताई जा रही है.

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