योजना की राशि खर्च का हिसाब देने में आनाकानी करते हैं वार्ड सदस्य



सहरसा। मुख्यमंत्री गली- नाली निश्चय योजना में पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है, परंतु व्ययगत राशि का हिसाब देने में जिले के वार्ड सदस्य व वार्ड सचिव रुचि नहीं दिखा रहे हैं। पंचायती राज विभाग द्वारा पंचायत सचिवों के अलावा व्ययगत राशि के अभिलेख संधारण के लिए लेखापाल सह आइटी सहायकों की नियुक्ति भी की गयी, परंतु अधिकांश पंचायतों के वार्ड सदस्यों व सचिवों द्वारा प्रावधान के विपरीत राशि व्यय करने के कारण अभिलेख संधारण में सहयोग नहीं किया जा रहा है। अभिलेखों के संधारण में असहयोग किए जाने की शिकायतें अधिकांश पंचायत के सचिव व लेखा सहायकों को प्राप्त हो रही है। जिसे जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है।
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योजना मद में जिले में तकरीबन 30 करोड़ हो रहा है वार्षिक खर्च
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जिले के दस प्रखंड के अन्तर्गत 151 वार्ड में कुल 2074 वार्ड हैं। इन वार्डों में प्रावधान के अनुसार मुख्यमंत्री गली- नाली निश्चय योजना में प्रति वार्ड 12 से 15 लाख रुपये प्रतिवर्ष खर्च किए जा रहे हैं। इस लिहाज से जिले में इस योजना पर 30 से 33 लाख रुपये हर वर्ष खर्च हो रहा है। इस राशि का अप- टू- डेट हिसाब रखने और नियमित अभिलेख संधारण के लिए लेखा सहायकों की नियुक्ति की गई, परंतु जिले के अधिकांश पंचायतों से लेखा संधारण में वार्ड सदस्य व वार्ड सचिव आनाकानी कर रहे हैं, जबकि विभाग से लगातार इसके लिए दबाव बनाया जा रहा है।
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आंकड़ों की प्रविष्टि नहीं किए जाने पर जिले के बीडीओ से भी पूछा गया स्पष्टीकरण
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मुख्यमंत्री ग्रामीण गली- नली योजना के क्रियान्वयन एवं राशि के हिसाब के लिए विभाग बेहद ही गंभीर है। इस क्रम में शत- प्रतिशत आंकड़ों की प्रविष्टि नहीं किए जाने के कारण जिले के सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को भी स्पष्टीकरण पूछा गया है। लेखा सहायकों के माध्यम से सभी पंचायतों के अभिलेख संधारण के लिए विभाग ने सात से 11 सितम्बर की तिथि भी निर्धारित किया था, परंतु वार्ड सदस्यों व सचिवों द्वारा सहयोग नहीं किए जाने पर विभाग ने खेद व्यक्त किया है। विभागीय अधिकारी ने समुचित तरीके से अभिलेख संधारण नहीं होने पर पूरी जबावदेही वार्ड सदस्य और सचिव पर जाने की स्पष्ट चेतावनी भी दी है।
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वार्ड सदस्यों और सचिवों द्वारा अभिलेख संधारण में लेखा सहायक को सहयोग नहीं किया जाना पूरी तरह अनुचित है, जबकि इस योजना का संचालन उनलोगों द्वारा ही किया जाता है, ऐसे में संधारण की पूरी जबावदेही उनलोगों की ही बनती है। सहयोग नहीं करनेवाले वार्ड सदस्य व सचिव इसके लिए पूरी तरह दोषी माने जाएंगे।
अजमल खुर्शीद, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, सहरसा।
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