पूर्व फेसबुककर्मी मार्क एस लुकी फेसबुक के खिलाफ दे सकते हैं गवाही

दिल्ली विधानसभा की शांति एवं सद्भाव समिति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर लगाए गए गंभीर आरोपों को देखते हुए, प्रत्यक्ष गवाह को बुलाने का फैसला किया है। मार्क एस लुकी नामक यह मुख्य गवाह पूर्व में फेसबुक से जुड़ा रहा है। उन्हें 10 नवंबर 2020 को समिति के समक्ष पेश होने के लिए औपचारिक नोटिस भेजा गया है।

2017 से 2018 तक फेसबुक के कर्मचारी रहे मार्क एस लुकी, डिजिटल रणनीतिकार, पूर्व पत्रकार और लेखक हैं। उन्होंने दुनिया के प्रभावशाली सामाजिक प्लेटफार्म फेसबुक, ट्विटर और रेडिट में मीडिया का नेतृत्व किया है। उन्होंने वाशिंगटन पोस्ट, सेंटर फॉर इन्वेस्टिगेटिव रिपोटिर्ंग, द लॉस एंजिल्स टाइम्स और एंटरटेनमेंट वीकली की डिजिटल पहल का भी नेतृत्व किया है।
दिल्ली विधानसभा की शांति एवं सद्भाव समिति के अध्यक्ष राघव चड्ढा ने कहा, मार्क एस लुकी ने नवंबर 2018 में फेसबुक छोड़ते समय दावा किया था कि फेसबुक भ्रामक कार्य प्रणाली से समुदायों में अपने कार्य और निष्क्रियता से विभाजन पैदा करता है। कंपनी के तंत्र में बड़े स्तर पर फैले नस्लवाद को उजागर करते हुए उन्होंने एक स्मरण लेख प्रकाशित किया। जहां उन्होंने बताया कि अल्पसंख्यकों को अब मालूम चल रहा है कि, फेसबुक द्वारा ही अल्पसंख्यकों के आपस में संवाद के लिए फेसबुक को सुरक्षित स्थान बनाने के उनके प्रयासों को पटरी से उतार दिया गया है। गैर-अश्वेत लोग सकारात्मक प्रयासों को भी अभद्र भाषा करार देकर रिपोर्ट कर रहे हैं जबकि अश्वेत लोग फेसबुक की सेवा शर्तो का उल्लंघन नहीं करते हैं। फिर भी उनकी सामग्री को बिना नोटिस के हटा दिया जाता है।
शांति एवं सद्भाव समिति के मुताबिक फेसबुक की ओर से मार्क एस लुकी के स्मरण लेख (ज्ञापन) को यह कहते हुए हटा दिया गया कि उसने सामुदायिक मानकों का उल्लंघन किया है। गौरतलब है कि समिति के सामने पेश होने वाले कुछ गवाहों (अवेश तिवारी और प्रतीक सिन्हा) ने भी ऐसे ही मुद्दों को लेकर आरोप लगाए हैं कि, फेसबुक का उन लोगों की सामग्री को लेकर रवैया पक्षपाती रहा है जो सत्तारूढ़ पार्टियों के आलोचक हैं।
समिति के मुताबिक पहली बार अंतरराष्ट्रीय फेसबुक कर्मचारी भारत में समिति के सामने फेसबुक के नकाब को उठाने और पर्दे के पीछे की वास्तविकताओं को उजागर करने के उद्देश्य से आगे आया है। इसलिए समिति की ओर से अभी तक की गई कार्यवाही के दौरान उसकी गवाही निर्णायक और महत्वपूर्ण होगी।
मार्क एस लुकी ने यह भी दावा किया है कि फेसबुक के पक्षपातपूर्ण तरीके के संचालन के कारण अल्पसंख्यक समुदाय यह विश्वास नहीं कर पा रहे हैं कि फेसबुक उनका भला चाहता है। फेसबुक द्वारा अल्पसंख्यकों को संचार प्रक्रिया से बाहर रखा जा रहा है। उन्होंने फेसबुक की कार्यप्रणाली में प्रचलित पूर्वाग्रहों और बहिष्कार योग्य ²ष्टिकोण को लेकर फेसबुक के उपेक्षापूर्ण रवैये को खुले तौर पर चुनौती दी है।
विभिन्न शिकायतकतार्ओं की ओर से लगाए गए समान आरोपों की सत्यता की पुष्टि करने के लिए समिति ने लुकी को जांच के लिए बुलाया है। क्योंकि वह खुद फेसबुक के पूर्व कर्मचारी रहे हैं। वह फेसबुक इंक की जटिलताओ, बारीकियों और कार्यों से अच्छी तरह परिचित हैं। अभी तक समिति को उन विशेषज्ञों से इनपुट मिले हैं जो बाहर से फेसबुक के कामकाज का निरीक्षण कर रहे हैं। लेकिन लुकी के माध्यम से समिति को फेसबुक की सूक्ष्मताओं से परिचित किया जाएगा, विशेष रूप से ऐसे किसी व्यक्ति के जरिए जिसने बेहद नजदीक से काम किया हो।
समिति ने शिकायतों के निराकरण के लिए और इस मुद्दे पर शीघ्र संज्ञान लेने के उद्देश्य से पिछली बैठकों में कुछ स्वतंत्र और विशेषज्ञ गवाहों की जांच की है, जिनकी शिकायतें फेसबुक के खिलाफ सार्वजनिक महत्व के मुद्दों को लेकर हैं।
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