स्वजनों को न शव मिला और न मिला अनुग्रह अनुदान योजना का लाभ

सहरसा। कोसी नदी के गाल में समाए कई लोगों के स्वजनों को शव नहीं मिलने के कारण मुख्यमंत्री अनुग्रह अनुदान योजना के लाभ से वंचित होना पड़ रहा है। सालों से लोग अंचलाधिकारी से लेकर जिलाधिकारी तक के कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं।

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केस नंबर 1
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शाहपुर पंचायत के कोसी नदी के देवनवन घाट के समीप तरबूज तोड़ने गए तीन बच्चे की डूबने से 23 जून 2019 मौत हो गई । इस हादसे में दो बच्चे का शव बरामद हुआ । जबकि एक मनोज गुप्ता की पुत्री वीणा कुमारी का शव बरामद नहीं हो सका।
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केस नंबर दो
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केदली पंचायत के धोबियाही गांव में 18 दिसंबर 2019 को नाव डूबने से सात लोग की मृत्यु हुई। इस घटना में चार लोगों का शव बरामद हो गया। जबकि माधिका देवी पति अशर्फी सादा , विनीता कुमारी पिता बनारसी यादव , नीतू कुमारी पिता सत्यनारायण पंडित का शव नहीं मिला।
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केस नंबर 3
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हाटी पंचायत के बरियाही गांव में घर के सामने ही खेलते हुए 28 जुलाई 2021 को विमलेश यादव का छह वर्षीय पुत्र रमन कुमार नदी में डूब गया जिसका शव बरामद नहीं हो सका।
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क्या है सरकारी प्रावधान
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प्राकृतिक आपदा के कारण मृतक का शव बरामद नहीं होने की स्थिति में अनुग्रह अनुदान योजना का लाभ देने हेतु सरकारी प्रावधान निश्चित किए गए हैं। राज्य आपदा राहत कोष समिति के निर्णय अनुसार प्राकृतिक आपदा की स्थिति में मृतक का शव नहीं मिलता है तो संबंधित व्यक्ति का फोटो के साथ समाचार पत्र में संबंधित व्यक्ति के लापता होने की सूचना जिलाधिकारी द्वारा प्रकाशित कराई जाएगी तथा एक महीना प्रतीक्षा किया जाएगा। इसके साथ ही संबंधित व्यक्ति के स्वजन स्थानीय थाना में मृत्यु व लापता होने की सूचना प्राथमिकी दर्ज कराएंगे। प्राकृतिक आपदा में हुई मृत्यु की जांच कार्यपालक पदाधिकारी से कराई जाएगी। कार्यपालक पदाधिकारी साक्ष्य के आधार पर प्राकृतिक आपदा से मृत्यु होने से संबंधित प्रतिवेदन समर्पित करेंगे। उसके उपरांत जिलाधिकारी संतुष्ट होने के बाद मुख्यमंत्री अनुग्रह अनुदान योजना का भुगतान निकटतम स्वजन को करेंगे।
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कहते हैं अधिकारी
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मुझे इसकी जानकारी नहीं है । आपदा से संबंधित सहायक प्रभारी ही कुछ बता सकते हैं।
अनिल कुमार, अंचलाधिकारी
नवहट्टा

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