थाना हो या अस्पताल मोबाइल एप पर जान सकेंगे कहां है

राज्य भर के थाना, अस्पताल समेत अन्य सरकारी भवन या कहां हैं, इसे लोग एक क्लिक पर अपने मोबाइल पर देख सकते हैं। सभी सरकारी दफ्तर की जीआईएस मैपिंग की जाएगी। अलग-अलग विभागों में यह काम चल रहा है। गृह विभाग अपने तमाम भवन और भूमि की जीआईएस मैपिंग कराकर उसे एप पर अपलोड करने की कार्रवाई जल्द करेगा। शुरुआत में यह चुनिंदा जिलों में होगा। इसके बाद बिहार के स्तर पर यह काम पूरा किया जाएगा।

बड़े विवाद वाले भूखंड भी शामिल होंगे
गृह विभाग के अधीन सभी भवन और भूमि की जीआईएस मैपिंग को लेकर हाल में ही बैठक आयोजित की गई थी। थाना, ओपी, पुलिस लाइन, ट्रेनिंग सेंटर और गृह विभाग के अधीन दूसरे भवन, खाली जमीन के अलावा राज्य के श्मशान और कब्रिस्तान की भी जीआईएस मैपिंग होगी। इसमें विवादित भूमि की पूरी जानकारी उपलब्ध होगी। भूमि विवाद से जुड़े वैसे मामले जो लंबे समय से चले आ रहे हैं और उससे विधि-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है उसका भी पूरा नक्शा और डिजिटल डाटा इसमें शामिल रहेगा। गृह विभाग से संबंधित भवन और भूमि की जीआईएस मैपिंग होने के बाद उसे एप पर अपलोड किया जाएगा। इसके लिए एप बनाया जा चुका है। कई तरह की जानकारियां आम लोगों से भी साझा की जाएंगी। एनआईसी की मदद से यह काम शुरू कर दिया गया है। प्रथम चरण में अरवल, पूर्णिया, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, मुंगेर, भागलपुर, सहरसा, सारण, गया और बेतिया जिले के गृह विभाग की संपत्तियों का जीआईएस मैपिंग होगी। इसमें किसी तरह की दिक्कत आती है तो एनआईसी द्वारा उसे दूर किया जाएगा। इसके पूरा होने के बाद बाकी जिलों से जुड़े भवन और भूमि का जीआईएस मैपिंग कर उसे एप पर अपलोड करने की कार्रवाई होगी।
अन्य विभागों से जुड़े कार्यालय आदि का भी इसी तरह जीआईएस मैपिंग कर डिजिटल नक्शा और डाटा तैयार किए जा रहा है। गृह विभाग अपनी जरूरतों के मुताबिक दूसरे विभागों के डाटा को अपने पास जमा करेगा। एप को कोई भी व्यक्ति प्लेस्टोर से डाउनलोड कर सकता है। अपर पुलिस महानिदेशक आधुनिकीकरण डॉ. कमल किशोर सिंह ने बताया कि जीआईएस मैपिंग के लिए पहले डाटा संग्रह का काम होगा। जीआइएस मैपिंग वाले जगहों का अक्षांश व देशांतर के साथ पूरा नक्शा एप में फीड किया जाएगा।
जल्द कार्रवाई में मिलेगी मदद
जीआइएस मैपिंग होने से सरकार के पास यह डाटा होगा कि किसी थाना क्षेत्र या जिले में किस-किस जगह कौन-कौन से संस्थान हैं, यह डाटा थाना, प्रशासन, ब्लाक, सिविल सर्जन सबके पास उपलब्ध होगा। इसके अलावा विवादित स्थल आदि की भी जानकारी होगी। इससे विधि-व्यवस्था में भी मदद मिलेगी।
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