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बेबी ने संघर्ष कर हासिल की अपनी मंजिल

सहरसा । महिलाएं पुरुषों के कंधा से कंधा मिलाकर हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही है। महिलाओं को सफलता के लिए काफी संघर्ष करनी पडती है। एक तो उन्हें पुरूष प्रधान समाज से बराबरी करने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है तो दूसरी ओर अपनी कैरियर में आनेवाली हर बाधाओं से संघर्ष कर अपनी मुकाम पाती है। संघर्ष के बदौलत ही बेबी कुमारी ने अपनी सफलता की मुकाम हासिल की है। शहर के कोसी कॉलोनी की रहनेवाली बेबी कुमारी की बचपन से ही इच्छा थी कि वे सामाजिक क्षेत्र में कार्य करें। इसीलिए उसने जीविका संगठन से जुड़ गयी। 2014 में वे जीविका से जुड़कर जिले के नवहट्टा प्रखंड में काम करना शुरू किया। नवहट्टा प्रखंड में सामुदायिक समन्वयक के रूप में अपनी शुरूआत करनेवाली बेबी महिलाओं को इकट्ठा कर उसे आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करने लगी। वे कहती है कि शुरू में तो काफी परेशानी हुई। महिलाओं को उसके घर के लोग ही नहीं निकलने देते थे। लेकिन निरंतर कोशिश एक दिन रंग लायी। जब महिलाओं को संगठित कर उसे स्वयं सहायता समूह से जोड़कर उसे छोटे-छोटे ऋण दिलाकर उससे रोजगार करवाना शुरू किया। उसके बाद तो महिलाओं की टोली जुटने लगी।
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दौ से अधिक महिलाओं को कराया स्वरोजगार
वे कहती है कि महिलाओं को उसकी क्षमता अनुसार ही कुटीर उद्योग से जोड़ दिया और उसकी विधिवत प्रशिक्षण दिलायी। तब जाकर किसी को पापड़ उद्योग, सत्तु, बड़ी, मखाना उद्योग को विकसित करना शुरू कर दिया। कुछ ही दिनों में तो महिलाएं खुद ही सामान बनाकर उसे बाजार में बेचने लगी और इसके बाद तो महिलाओं ने खुद ही बैंक जाकर पैसे जमा करना व निकालना शुरू कर दिया। आमदनी बढ़ते ही महिलाओं ने खुद अपनी किस्मत लिखनी शुरू कर दी। इसके बाद भी महिलाएं घर की चूल्हा चौका करने के बाद ही अपने व्यवसाय को भी धीरे-धीरे बढाना शुरू कर दिया। बेबी कहती है कि वे करीब 200 महिलाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराकर उसे आत्मनिर्भर बनाया।
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सामाजिक कुरीतियों के विरूद्ध चलाया जागरूकता
बेबी कहती है कि वे सहरसा जिले के विभिन्न प्रखंडों में करीब छह वर्षों तक सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया। लोगों को दहेज, निरक्षरता एवं बाल विवाह के विरूद्ध जागरूकता का संदेश दिया। सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लोगों को जागरूक कर एक प्रेरक पहल की।

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