जयंती पर याद किए गये शिक्षाविद सर सैयद अहमद खां

सहरसा। अल-रहमान फाउंडेशन के तत्वावधान में सहरसा बस्ती में समाज सुधारक व शिक्षाविद सर सैयद अहमद खां की 204वीं जयंती मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व वार्ड पार्षद मु. मशरफ हुसैन ने कहा कि सर सैयद अहमद खां एक युग पुरुष थे। उन्होंने अनेक स्कूल, कालेज खोलकर शिक्षा के महत्व से भारतीय समाज को परिचित कराया। इस अवसर पर शिक्षक मुख्तार आलम ने कहा कि किसी भी देश और समाज का विकास शिक्षा के बिना नहीं हो सकता है। शिक्षा के प्रचार प्रसार से सामाजिक एकता और सद्भाव बढ़ता है और खुशहाली आती है। जब 1857 की क्रांति विफल हो गई तो सर सैयद अहमद खां ने महसूस किया कि शिक्षा के अभाव के कारण ही जागरूकता का अभाव है। परिणामस्वरूप लोग क्रांति से जुड़ नहीं पाए। उन्होंने भारतीय समाज में चेतना जगाकर स्वतंत्रता आंदोलन की पृष्ठभूमि तैयार की। इसके साथ ही वे समझते थे कि मुस्लिम समाज की जड़ता विज्ञानी सोच और शिक्षा के प्रचार-प्रसार से ही समाप्त किया जा सकता है। इसके लिए उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना की। मुस्लिम समाज की तरक्की और उसमें व्यापक सुधार शिक्षा के माध्यम से ही हो सकता है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में नवजागरण का सूत्रपात किया। डा. मोइजुद्दीन ने कहा कि सर सैयद अहमद खां ने देश में सामाजिक एकता को मजबूत किया। कार्यक्रम के संयोजक मु. ओबैदुल्लाह ने कहा कि सर सैयद अहमद खां व्यक्तित्व, कृतित्व और संपूर्ण जीवन प्रेरणादायक है।उनके बताए मार्ग पर चलकर ही एक खुशहाल और शांतिपूर्ण समाज के सपने को साकार कर सकते हैं। इस अवसर पर फारुख र•ा, मु. अकबर आदि ने अपने विचार रखे। संचालन मु. बरकतुल्लाह ने किया।इस अवसर पर मु. मन्नू खां, अनवर हुसैन, मु.नौशाद, मंसूर आलम, मुमताज खान, मु. फारुख र•ा, वार्ड पार्षद प्रतिनिधि अकबर हुसैन, मु. साकिर हुसैन, इफ्तेखार आलम, मु.सोहैल, मु. सलाम पतरु, मु. मोजाहिद आदि उपस्थित थे।


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