चोरी की गाड़ी से पहुंचाई जाती है शराब, देसी का हो रहा है निर्माण

सहरसा। शराब तस्करी का जिले में एक संगठित गिरोह चल रहा है। हर माह सौ से अधिक मामले तस्करी के दर्ज हो रहे हैं। कई तस्कर की गिरफ्तारी हो रही है। लेकिन तस्करी थम नहीं रहा है। शहर से लेकर गांव तक विदेशी शराब आसानी से लोगों को मिल रहा है। जबकि देसी शराब स्थानीय स्तर पर बनाकर बेचा जाता है। यही नहीं तस्कर चोरी की गाड़ी या सैकेंड हैंड गाड़ी का शराब पहुंचाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।

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सुनसान जगह पर उतारी जाती है शराब
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शराब तस्कर कई गोदाम बनाकर उसके अंदर ट्रक या अन्य गाड़ी घुसा देते हैं। जहां से शराब छोटे तस्कर को बेचा जाता है। शहर के समीप ही एक गोदाम से कई कार्टन शराब की बरामदगी पुलिस ने की थी। इसके अलावा सुनसान जगह, बंद चिमनी, खेतों में शराब का ट्रक लगाकर शराब उतारी जाती है। कई बार पुलिस इस रैकेट को पकड़ने में कामयाब रही है। परंतु तस्कर हर बार बच निकलने में कामयाब हो जाते हैं। मामले में चालक या अन्य पकड़ में आ पाता है।

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तेल के टीना व सिलेंडर में मंगायी जाती है शराब
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शराब तस्कर शराब मंगाने के कई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। तेल के टीन के अंदर शराब भरकर लाया जाता है। ताकि कोई रास्ता में शक नहीं कर सके। इसके अलावा गैस सिलेंडर से भी शराब मंगायी जाती है। यही नहीं पोस्टआफिस के वैन में भी शराब तस्करी होती है। एंबुलेंस का भी उपयोग तस्करी के लिए किया जाता है। कई बार जब गाड़ियां पकड़ी जाती है तो वह या तो चोरी की रहती है या फिर सैकेंड हैंड रहती है। कई शराब तस्कर को कुछ थाना में मंडराते भी देखा जाता है। लेकिन उसपर पुलिस को शक तक नहीं हो पाता है।
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देसी शराब का होता है निर्माण
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कई गांव में देसी शराब का निर्माण हो रहा है। कई भट्ठी पकड़े गये, ध्वस्त किया गया। लेकिन उत्पाद विभाग या पुलिस ठोस कार्रवाई नहीं कर पाती है। जिले की अगर बात करें तो शराब तस्कर से मिलीभगत मामले में उत्पाद अधीक्षक से लेकर विभाग के कई लोगों पर कार्रवाई हुई। इंस्पेक्टर व जमादार को जेल की हवा खानी पड़ी थी। लेकिन उस समय जिन लोगों का नाम सामने आया था और पुलिस ने अनुसंधान में उसे अभियुक्त बनाया था वेसे लोग अब भी उत्पाद विभाग के आसपास दिख जाते हैं।

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