नये दिख रहे हैं अपडेट, पुराने अब भी दिख रहे ढीले-ढाले

संवाद सूत्र, सहरसा : पुलिस के नये अधिकार और जवान तो वर्दी मामले में अपडेट दिखते हैं। उनका स्मार्ट लुक भी दिखता है, लेकिन अब भी पुराने कुछ अधिकारी और जवान वर्दी में भी ढीले-ढाले ही दिखते हैं। पुराने जवान व अधिकारी की बात करें तो कई का पेट निकला रहता है तो कई के जूते अनुरूप नहीं रहते हैं, जबकि खाकी वर्दी पुलिस की पहचान है। वर्दी पर लगने वाले स्टार से उनके पद का पता चलता है। अपडेट रहने से उनके लुक में निखार आता है। खासकर इन दिनों महिलाओं की काफी संख्या में बहाली हुई है। उनकी ड्यूटी भी लगाई जा रही है। इन महिलाओं की वर्दी पूरी तरह अपडेट रहती है, जबकि नये दारोगा भी इस मामले में पीछे नहीं हैं।


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इंस्पेक्टर स्तर तक मिलता है वर्दी भत्ता
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सिपाही, हवलदार, एएसआई, एसआई से लेकर इंस्पेक्टर तक वर्दी भत्ता दिया जाता है। इन्हें हर वर्ष निर्धारित राशि दी जाती है। करीब एक दशक से राज्य सरकार द्वारा सिपाहियों को वर्दी भत्ता के रूप में राशि ही दी जाती है। सिपाही और हवलदार को प्रति वर्ष वर्दी भत्ता के रूप में दस हजार रुपये और एएसआई से लेकर इंस्पेक्टर रैंक तक ग्यारह हजार रुपये प्रति वर्ष दी जाती है। ताकि जवान से लेकर इंस्पेक्टर तक अपनी पंसद की वर्दी सिला सके।
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पैंट, शर्ट से लेकर मौजा तक खरीदने को दी जाती है राशि
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पुलिसकर्मियों को मिलने वाली वर्दी भत्ता राशि में पूरी वर्दी खरीदनी पड़ती है जिसमें पैंट, शर्ट, मौजा, बूट, टोपी, भिसिल कोड, पिस्टल डोरी, रायफल सिलिग, गोली रखने के लिए पाउच खरीदनी पड़ती है। एक-एक सिपाही दो-तीन सेट में सारा ड्रेस अपडेट रखते हैं। जिले में करीब एक हजार पुलिस कर्मियों सहित पुलिस पदाधिकारियों को वर्दी भत्ता का लाभ मिलता है जिसमें से करीब 80 फीसद कर्मियों को वर्दी भत्ता मिल चुका है। अक्टूबर माह 21 में ही आवंटन आया था। आवंटन अनुरूप वेतन भत्ता दिया गया।
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कोट
जिले के पुलिसकर्मियों सहित इंस्पेक्टर रैंक तक सबों को वर्दी भत्ता दी जाती है। पुलिसकर्मियों को वर्दी भत्ता मिलने से हर जवान हर हमेशा वर्दी में ही अपडेट रहते है। हर वर्ष वर्दी भत्ता के लिए अलग से आवंटन आता है।
बृजनंदन मेहता, डीएसपी मुख्यालय

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