काला पड़ने लगा आम का मंजर, किसानों में छाई मायूसी

संसू, सत्तरकटैया (सहरसा) : आम के मंजरों से भरा बगीचा देखकर किसान उत्साहित थे। अन्य वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष अत्यधिक आम होने की किसानों को उम्मीद थी, मगर अचानक मौसम में आए बदलाव एवं बढ़ते तापमान से आम फसल को क्षति पहुंचने की आशंका से परेशान किसानों की चिता बढ़ने लगी है। अचानक अत्यधिक गर्मी होने की वजह से मंजर सूखने और काले पड़ने लगे हैं।

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मधुवा रोग के कारण सूखतर है मंजर
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कृषि विज्ञान केंद्र अगवानपुर के विज्ञानी डा. पंकज कुमार के अनुसार इस वर्ष पेड़ में लगने वाले मधुवा रोग का ज्यादा प्रभाव रहेगा। मधुवा रोग भुगना नामक छोटा स्लेटी और गहरे रंग का फुदकने वाला कीट है। यह छोटे बच्चे और वयस्क दोनों ही आम के मंजरों, नई शाखाओं और पत्तियों का रस पी जाता है। इसके कारण मंजर सूख जाते हैं और फल भी सूखकर गिर जाता है। यह कीट एक चिपकने वाला मधु जैसा पदार्थ पैदा करता है। इससे पत्तियों पर काली फफूंद जम जाती है और पूरी पत्ती काली हो जाती है।

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अप्रैल से कीटनाशी का करें छिड़काव
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कृषि विज्ञानी के अनुसार, कीट से बचने के लिए कीटनाशी का छिड़काव अप्रैल से मई माह तक तीन बार किया जाना चाहिए। छिड़काव के लिए लेंबडा साई एलोथ्रीन एक एमएल प्रति लीटर या रोगर दो एमएल प्रति लीटर की दर से प्रति व्यस्क पेड़ 25 लीटर घोल बनाकर उससे मंजर और पेड़ की टहनी और डंठल, पत्ते पर भी इतना छिड़काव करें कि पूरा पेड़ भींग जाय।
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किसानों का है कहना
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आम में अन्य वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष मंजर अधिक आया है, मगर बढ़ते तापमान की वजह से आम मंजर सूखने एवं काले पड़ने लगे हैं। जो आने वाले समय में नुकसानदायक साबित हो सकता है।
मनोज दत्ता, पटोरी
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विज्ञानी के सलाह से आम बगीचा का निगरानी किया गया। इस वर्ष आम में अत्यधिक मंजर भी आया, मगर बढ़ते तापमान की वजह से आम मंजर सूखने एवं काला पड़ने लगा है जो आगे नुकसानदायक साबित हो सकता है।
पंकज कुमार सिंह, पंचगछिया।
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किसानों के लिए कृषि विज्ञानियों की सलाह
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गर्मी का प्रकोप ज्यादा रहा तो आम के नए मंजर में फूलों की संख्या कम लगेगी और पराग की प्रक्रिया प्रभावित होगी। इससे उत्पादन कम होने की संभावना बनी रहती है। हालांकि जिन किसानों ने आम में मंजर आने से पूर्व बगीचे की सिचाई की होगी, उन बगीचों में लगे आम के मंजर को गर्मी में भी राहत मिलेगी इसलिए आम बगीचे की मिट्टी को नम बनाए रखना लाभप्रद होता है लेकिन मंजर आने के बाद बगीचे की सिचाई करना आम फसल के लिए घातक साबित हो सकता है। मटर के दाने के बराबर फल हो जाने के बाद इमिडाक्लोरप्रीड (17.8 एस0एल0) एक मिली. दवा प्रति दो लीटर पानी में और हैक्साकोनाजोल एक मिली. लीटर पानी या डाइनोकैप (46 ई0सी0) एक मिली. दवा प्रति एक लीटर पानी में घोलकर छिड़कने से मधुवा एवं चूर्णिल आसिता की उग्रता में कमी आती है।
डा. पंकज कुमार, विज्ञानी, कृषि विज्ञान केंद्र अगवानपुर।

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