श्रद्धालुओं ने मनोकामना लिग पर चढ़ाया सवा लाख बेलपत्र

संवाद सूत्र, सिंहेश्वर (मधेपुरा) : बिहार के सुप्रसिद्ध बाबा मंदिर सिंहेश्वर में सोमवार की तीसरी सोमवारी को महादेव के मनोकामना लिग का सवा लाख बेलपत्र से विशेष श्रृंगार पूजन किया गया। श्रृंगार पूजन प्रारंभ करने से पहले बाबा को शहद, शक्कर व इत्र का लेप लगा कर अभिषेक कराया गया। इसके बाद सवा लाख बेलपत्र के साथ विभिन्न प्रकार के फूलों से बाबा की पूजा शुरू हुई। इस दौरान विशेष पूजा देखने के लिए पड़ोसी देश नेपाल सहित आसपास के जिलों से हजारों की तादाद में श्रद्धालुगण मंदिर पहुंचे थे। बाबा भोलेनाथ के अलौकिक दृश्य की एक झलक पाने के लिए हजारों की भीड़ आतुर दिखी। इससे पहले यजमान जवाहर सिंह, सिंहेश्वर मंदिर न्यास समिति की सदस्य स्मिता सिंह, मुरारी सिंह, राजू सिंह, प्रिया सिंह, हर्ष, ओम व दीक्षा ने विशेष पूजा प्रारंभ की। मौके पर मुख्य पुजारी कलानंद ठाकुर ने यजमान जवाहर सिंह को संकल्प कराया। विशेष श्रृंगार पूजन आचार्य उदय नाथ ठाकुर, शंभु नाथ ठाकुर व अन्य पंडा ने विशेष पूजा कराया। इस दौरान इत्र और चंदन की खुशबू से बाबा गर्भगृह का वातावरण भक्तिमय बन गया था। वहां गंगाजल से बाबा का जलाभिषेक किया गया। फिर कई प्रकार के फल और मिठाई का बाबा को भोग लगाया गया। अंत में गगनभेदी मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजा संपन्न हुआ।


विशेष पूजा में भक्तों ने शिवलिग पर चढ़ाया बेलपत्र मुख्य पुजारी कलानंद ठाकुर ने बताया कि विशेष पूजा में भक्तों द्वारा महादेव के शिवलिग पर बेलपत्र चढ़ाया जाता है। इसमें सवा लाख बेल पत्र चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। पंडित कलानंद ठाकुर ने कहा कि समुद्र मंथन के दौरान जब हालाहल नाम का विष निकलने लगा तो सभी देवता व जीव जंतु व्याकुल होने लगे थे।
इसी दौरान भगवान शंकर ने विष को अपनी अंजुली में लेकर पी लिया और विष को कंठ में रख लिया था। समुद्र मंथन के बाद से शिव को नीलकंठ, विषधर के नाम से पुकारा गया और उसी दिन से शिवलिग पर जल व बेल पत्र चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई। बेल पत्र जिसे संस्कृत भाषा में बिल्व पत्र कहा जाता है। देवों के देव महादेव को बेल पत्र अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि शिवलिग पर बेल पत्र चढ़ाने से सारे पापों से मुक्ति मिल जाती है।
भगवान शिव की पूजा में बेल पत्र का है विशेष महत्व
भगवान शिव की पूजा में बिल्व पत्र यानी बेल पत्र का विशेष महत्व है। महादेव एक बेलपत्र अर्पण करने से भी प्रसन्न हो जाते हैं, इसलिए उन्हें आशुतोष भी कहा जाता है। सामान्य तौर पर बेलपत्र में एक साथ तीन पत्तियां जुडी रहती हैं, जिसे ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक माना जाता है। कलानंद ठाकुर के अनुसार बेलपत्र वृक्ष के आसपास सांप नहीं आते। अगर कोई बेलपत्र वृक्ष की छाया से होकर गुजरे तो उसको मोक्ष प्राप्त होती है। श्रृंगार पूजन में न्यास समिति के सदस्य सुशांत गौरव, निशांत, राहुल, धीरज, अभिमन्यु, सुधीर झा, कैलाश यादव, पप्पू यादव व अन्य शामिल थे।

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