प्रकृति व प्राकृतिक उत्पाद पर आकर्षित हो रहे लोग



-दुनिया की सबसे पुरानी और सुलभ चिकित्सा पद्धति का लौट रहा दौर
-औषधीय खेती की ओर आकर्षित हो रहे किसान, बढ़ रहा औषधीय खेती का रकवा
-जिले के बसंतपुर, राघोपुर, त्रिवेणीगंज व प्रतापगंज में हो रही औषधीय खेती
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जागरण संवाददाता, सुपौल : दुनिया की सबसे पुरानी और सुलभ चिकित्सा पद्धति यानी आयुर्वेद की ओर लोग एक बार फिर से आकर्षित हो रहे हैं। प्रकृति व प्राकृतिक उत्पाद पर लोगों का विश्वास बढ़ा है। नतीजा है कि एक बार फिर से आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का दौर लौट आया है। सस्ता और सुलभ होने के कारण लोग इस ओर आकर्षित हुए हैं। बाजारों में भी प्राकृतिक उत्पादों की भी भरमार है और लोग इससे लाभान्वित हो रहे हैं।

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प्रभावी साबित हो रही आयुर्वेद चिकित्सा
आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति दुनिया की सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धति मानी जाती है। पहले जब एलोपौथ और होम्योपैथ का चलन नहीं था तब आयुर्वेद पद्धति से ही इलाज होता था। जड़ी-बूटी के सहारे लोगों की बड़ी से बड़ी बीमारी भी दूर की जाती थी। उस समय चिकित्सक नहीं बल्कि वैद्य होते थे और उनके द्वारा ही लोगों का इलाज किया जाता था। धीरे-धीरे एलोपैथ व होम्योपैथ चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद पर हावी होती गई। नतीजा हुआ कि लोग प्रकृति और प्राकृतिक उत्पाद से बेजार से हो गए। अब एक बार फिर से आयुर्वेद का दौर लौटा है और आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति वर्तमान समय में प्रभावी साबित हो रही है।
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औषधीय खेती के प्रति किसानों की बढ़ी जागरुकता
प्रकृति व प्राकृतिक उत्पाद के प्रति लोगों का बढ़ रहा विश्वास प्राकृतिक उत्पाद के उत्पादन में भूमिका निभा रहा है। परंपरागत खेती से अधिक लाभ मिलने के कारण किसानों का ध्यान भी आयुर्वेद उत्पाद की ओर गया है। नतीजा है कि किसान भी औषधीय खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। अब सुपौल जिले की ही बात ले लीजिये। जिले के बसंतपुर, राघोपुर, प्रतापगंज, त्रिवेणीगंज आदि प्रखंडों में किसान औषधीय खेती की ओर अग्रसर हुए हैं। किसानों द्वारा औषधीय खेती के रूप में मेंथा, लेमनग्रास, एलोवेरा, तुलसी आदि की खेती की जा रही है। ऐसा नहीं कि पहले औषधीय खेती नहीं होती थी, कितु सरकार व विभागीय उदासीनता के कारण किसान औषधीय खेती से बेजार होते चले गए। अब जब आयुर्वेद का दौर लौट आया है तो किसान भी इस ओर जागरूक हुए हैं।
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आयुर्वेद दवा का नहीं है कोई साइड इफेक्ट
बाजार भी प्राकृतिक उत्पाद से भरा-पड़ा है। एलोबेरा जूस, आंवला जूस, जॉली तुलसी और न जाने क्या-क्या। लोग इन प्राकृतिक उत्पादों से स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं। अब तो डायबिटीज, ब्लड प्रेशर आदि तक की दवाई आयुर्वेद में सुलभ उपलब्ध हैं। 5 रुपये में डायबिटीज की गोली मिल रही है। चिकित्सक बताते हैं कि आयुर्वेद के इन दवाओं का कोई साइड इफेक्ट भी नहीं। नतीजा है कि अब लोग एलोपैथ व होम्योपैथ की जगह आयुर्वेद पर भरोसा करने लगे हैं और लोगों का विश्वास प्रकृति व प्राकृतिक उत्पाद की ओर बढ़ चला है।
Posted By: Jagran
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